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छात्र को दूसरे बच्चों से थप्पड़ लगवाने वाली टीचर को हाईकोर्ट से झटका, जेल जाने का खतरा मंडराया

 मुजफ्फरनगर में क्लास के अंदर ही मुस्लिम बच्चे को अन्य बच्चों से थप्पड़ लगवाने वाली टीचर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने टीचर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी कर दी है।टीचर ने न सिर्फ बच्चे को थप्पड़ मरवाया था बल्कि सांप्रदायिक टिप्पणी भी की थी।

पिछले साल हुई इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद देश भर में चर्चा का विषय बना और लोगों में आक्रोश फैल गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया था और बच्चे की काउंसिलिंग कराने के साथ ही दूसरे स्कूल में दाखिला कराने का सरकार को निर्देश दिया था। 

न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की अदालत ने टीचर तृप्ति त्यागी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें इस आदेश की तिथि से दो सप्ताह के अंदर संबंधित अदालत के सामने सरेंडर करने और नियमित जमानत याचिका के लिए अर्जी दायर करने का निर्देश दिया है। हालांकि एक बार निचली अदालत से भी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। ऐसे में टीचर पर जेल जाने का खतरा मंडराने लगा है।

अदालत ने 23 नवंबर के अपने आदेश में कहा कि दो सप्ताह की अवधि या याचिकाकर्ता के निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के समय तक उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी। पीड़ित पक्ष के वकील कामरान जैदी ने बताया कि अधीनस्थ न्यायालय 16 अक्टूबर को पहले ही आरोपी अध्यापिका की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है और अब उच्च न्यायालय ने भी निर्णय को सही ठहराया है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक पुलिस ने आरोपी अध्यापिका तृप्ति त्यागी के खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323, 504 और 295ए सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा, किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत भी अध्यापिका के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। पिछले वर्ष अगस्त में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें खुब्बापुर गांव में टीचर त्यागी दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को एक मुस्लिम बच्चे को थप्पड़ मारने का निर्देश देती और सांप्रदायिक टिप्पणी करती हुई नजर आ रही थी।

पुलिस ने इस घटना को लेकर टीचर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जबकि स्कूल को भी प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा नोटिस जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर, 2023 को पीड़ित बच्चे की काउंसलिंग कराने का आदेश दिया था, जिसका पालन नहीं करने के लिए प्रदेश सरकार को फटकार भी लगाई थी।

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