पदोन्नति मामले में अगली सुनवाई अब 3 अप्रैल को
पिछली बहस से ही यह तय हो गया था कि सर्विस मामले के महान वकील की नजर में अल्पसंख्यक विद्यालय है। उसको वह RTE एक्ट के दायरे में लाना चाहते हैं।
एक देश में शिक्षा का दो विधान नहीं हो सकता है।
आज उसपर उन्होंने विस्तार से अपना पक्ष रखा।
शिक्षा ही किसी देश की रीढ़ होती है। अल्पसंख्यक विद्यालय को RTE से बाहर करने पर देश पर विभाजन का संकट है।
आज महान्यायवादी ने स्पष्ट किया कि RTE एक्ट चाइल्ड सेंटर्ड है।
चाइल्ड कमीशन को भी उन्होंने ड्रैग कर लिया है।
देखा जाए तो सर्विस मामलों के शहंशाह ने सबकुछ ड्रैग कर लिया है।
पदोन्नति मैटर को ड्रैगआउट कराना होगा।
चाहे स्टेट्स को लेकर या कुछ भी करके उसे अलग कराना होगा।
अन्यथा पदोन्नति मामला लम्बा खिंच सकता है।
अविचल

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