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अनुकंपा नियुक्ति अप्रत्याशित लाभ नहीं: हाईकोर्ट

 प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि योग्यता माता-पिता से नहीं मानी जानी चाहिए, बल्कि खुली प्रतिस्पर्धा के माध्यम से हासिल की जानी चाहिए। अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों का उद्देश्य मृतक के परिजनों के लिए अप्रत्याशित लाभ अर्जित करना नहीं है। नियोक्ता को केवल वित्तीय स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है जो रसोई की आग को जलाए रखती है।



यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने दिवंगत बैंक कर्मचारी की पत्नी द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करने के स्टेट बैंक के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पाया कि याची की पारिवारिक आय उसके अंतिम वेतन के 75 प्रतिशत से अधिक थी और कर्मचारी की मृत्यु के परिणामस्वरूप परिवार को वित्तीय अभाव का सामना नहीं करना पड़ा। इस प्रकार, ऐसे तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि परिवार की आय मृत कर्मचारी द्वारा प्राप्त अंतिम वेतन के 75 प्रतिशत से अधिक थी।

और उसकी मृत्यु के परिणामस्वरूप परिवार को वित्तीय अभाव का सामना नहीं करना पड़ रहा था। कोर्ट ने कहा कि मृतक कर्मचारी के परिवार की आय मृतक द्वारा प्राप्त अंतिम वेतन के 60 प्रतिशत से अधिक है। वास्तव में याची की पारिवारिक आय उसके द्वारा प्राप्त अंतिम वेतन के 75 प्रतिशत से अधिक है। इस प्रकार परिवार की आय यह स्थापित करती है कि कर्मचारी की मृत्यु के परिणामस्वरूप परिवार को वित्तीय अभाव का सामना नहीं करना पड़ा।

मामले के अनुसार याची चंचल सोनकर का पति स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का कर्मचारी था। वर्ष 2022 में उसकी मृत्यु हो गई। मृतक का अंतिम आहरित सकल वेतन एक लाख 18 हजार 800 रुपये था। बैंक ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए याची के दावे को अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का एकमात्र उद्देश्य परिवार को परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के परिणामस्वरूप होने वाले तत्काल वित्तीय संकट से उबरने में सक्षम बनाना है।

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