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अम्बेडकरनगर: शिक्षक विहीन/एकल विद्यालयों के समायोजन की काउंसलिंग रद्द, BEO कटेहरी का आदेश निरस्त | Primary Ka Master News

 Primary Ka Master News | Ambedkarnagar:

परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय कटेहरी–अम्बेडकरनगर द्वारा शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षक विद्यालयों के समायोजन

(Single Teacher School Adjustment) को लेकर जारी काउंसलिंग संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया गया है। इस संबंध में कार्यालय की ओर से आदेश निरस्तीकरण ज्ञापन जारी कर दिया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।


🔔 क्या है पूरा मामला?

खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पहले:

  • पत्र संख्या बीओआरसी/1199–1202/2025–26

  • दिनांक 27 दिसंबर 2025

  • परिषदीय विद्यालयों में

    • शिक्षक विहीन विद्यालय

    • एकल शिक्षक विद्यालय

में समायोजन हेतु काउंसलिंग का आदेश जारी किया गया था।

➡️ अब उसी आदेश को पूरी तरह वापस (Cancel) कर दिया गया है।


📄 आदेश में क्या कहा गया है?

जारी निरस्तीकरण आदेश में स्पष्ट किया गया है कि:

  • पूर्व में जारी काउंसलिंग आदेश

  • तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है

  • उक्त आदेश को अब प्रभावहीन माना जाएगा

➡️ यानी फिलहाल कोई समायोजन / काउंसलिंग प्रक्रिया लागू नहीं रहेगी


⚠️ सभी संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को सूचना

खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने निर्देश दिए हैं कि:

  • इस आदेश की जानकारी

  • सभी संबंधित:

    • अधिकारियों

    • प्रधानाध्यापकों

    • शिक्षकों

तक अनिवार्य रूप से पहुंचाई जाए, ताकि:

  • किसी प्रकार का भ्रम

  • असमंजस

  • गलतफहमी

❌ न बने।


🔄 आगे क्या होगा?

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि:

  • भविष्य में यदि:

    • समायोजन

    • काउंसलिंग

    • या कोई अन्य कार्रवाई

की आवश्यकता होगी, तो:
✔️ नई और पृथक सूचना/दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे


📬 आदेश की प्रतिलिपि कहां भेजी गई?

निरस्तीकरण आदेश की प्रतिलिपि भेजी गई है:

  • 📌 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय

  • 📌 संबंधित प्रधानाध्यापक/शिक्षक

  • 📌 कार्यालय अभिलेख


✊ शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया

शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय को:

  • ✔️ राहत भरा कदम

  • ✔️ शिक्षकों के हित में

बताया है।
उनका कहना है कि:

“समायोजन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के लिए
स्पष्ट, पारदर्शी और राज्य-स्तरीय दिशा-निर्देश
आवश्यक हैं, ताकि शिक्षकों और विद्यालयों
दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।”


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