Important Posts

Advertisement

Govt Jobs : Opening

CTET विवाद में नया मोड़: NCTE ने स्पष्ट किया—B.Ed धारक प्राथमिक शिक्षक पद के लिए अपात्र; विशेषज्ञों ने Article 32 में रिट की सलाह दी

 नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) में B.Ed धारकों की पात्रता को लेकर कई दिनों से चल रहे विवाद पर राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने स्पष्ट कर दिया है कि B.Ed अब प्राथमिक (कक्षा 1–5) स्तर के लिए मान्य योग्यता नहीं है। इस स्पष्टीकरण के बाद उन अभ्यर्थियों में असमंजस गहरा गया है, जिन्होंने B.Ed को आधार मानकर CTET प्राथमिक स्तर का फॉर्म भरने की तैयारी की थी।

NCTE का स्टैंड: विशिष्ट BTC स्वीकार, पर B.Ed नहीं

कई अभ्यर्थियों द्वारा विशिष्ट BTC से फॉर्म स्वीकार होने की सूचना पर NCTE ने कड़ा स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि B.Ed योग्यता प्राथमिक स्तर के लिए उपयुक्त नहीं है।
यह स्थिति तीन महीने पहले आए न्यायिक फैसले से उत्पन्न हुई है, परंतु इसका प्रभाव अब बड़े पैमाने पर दिखने लगा है।

न्यायालय का संदर्भ: जस्टिस दत्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस का निर्णय

हालिया निर्णय में न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि—

  • केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर किए गए संशोधन शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के अनुरूप होने चाहिए।

  • Article 21A (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार) को ध्यान में रखते हुए B.Ed धारकों को प्राथमिक के लिए पात्र नहीं माना जा सकता

  • इस पर Uttarakhand (UTA) केस में भी मुहर लग चुकी है।

विश्लेषकों के अनुसार, कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि “कानून की अनजानगी (Ignorance of law) किसी को राहत नहीं दे सकती।”

अभ्यर्थियों को सलाह: Article 32 में सीधी रिट याचिका

विशेषज्ञों के अनुसार B.Ed धारकों के पास सबसे व्यावहारिक विकल्प है कि वे—

  • NCTE और भारत सरकार (UoI) को पक्षकार बनाते हुए,

  • सीधे संविधान के Article 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल करें।

दलील यह रखी जा सकती है कि—

  1. जब जजमेंट दिया गया है, तो B.Ed अभ्यर्थियों को अवसर (बैठने/पात्रता का स्थानांतरण) भी प्रदान किया जाए।

  2. वर्ष 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर NCTE के योग्यता नियम लागू नहीं हो सकते, क्योंकि—

    • NCTE को पहली बार 2001 में न्यूनतम योग्यता तय करने का अधिकार मिला,

    • 2011 संशोधन के बाद ही कक्षा 1–12 के लिए पूरी योग्यता NCTE के दायरे में आई।

कानूनी तर्क: "2001 के पूर्व नियुक्तियों पर NCTE नियम क्यों?"

विश्लेषण के अनुसार:

  • 2001 से पूर्व शिक्षकों की नियुक्ति पर NCTE का कोई प्रभाव नहीं था।

  • इसलिए उन पर 2011 के संशोधित नियम लागू करना तर्कसंगत नहीं है।

जज़मेंट पर सवाल: ‘गलती केवल बाबुओं की’

जस्टिस बोस ने B.Ed को प्राथमिक से बाहर करते हुए टिप्पणी की कि प्रणालीगत त्रुटि ब्यूरोक्रेटिक स्तर पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस आधार पर B.Ed धारकों को न्याय पाने की संभावना मौजूद है।

विश्लेषक का निष्कर्ष

विश्लेषक #Rana ने कहा कि—

  • अभ्यर्थियों को "नेताओं के भरोसे करियर दांव पर नहीं लगाना चाहिए"।

  • गलत सलाह या 'कथित रिव्यू' पर निर्भर रहने से नुकसान हो सकता है।

  • समाधान केवल सुप्रीम कोर्ट में विधिक राहत से ही संभव है।

ليست هناك تعليقات:

إرسال تعليق

UPTET news