बैंक खाते से ठगी पर बड़ा फैसला: 10 दिन में पैसा लौटाना बैंक की जिम्मेदारी – NCDRC OTP साझा नहीं किया तो खाताधारक की शून्य देयता

 राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने बैंक खातों से होने वाली ठगी को लेकर एक अहम और उपभोक्ता हितैषी फैसला सुनाया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी खाताधारक के खाते से अवैध तरीके से धन निकासी होती है और इसमें खाताधारक की कोई गलती या लापरवाही नहीं है, तो बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर पूरी रकम लौटानी होगी


⚖️ NCDRC का स्पष्ट रुख

यह फैसला एनसीडीआरसी के अध्यक्ष जस्टिस एपी शाही और सदस्य भरतकुमार पांड्या की पीठ ने सुनाया।
आयोग ने महिला खाताधारक के पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ बैंक की अपील खारिज कर दी

आयोग ने कहा कि:

बैंक खाताधारक के धन का कुशल संरक्षक (Custodian) होता है और लापरवाही न होने पर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।


📄 क्या था मामला?

  • महिला खाताधारक के बैंक खाते से

    • शाम 7 बजे और

    • रात 12 से 1 बजे के बीच
      संदिग्ध लेनदेन हुए

  • खाताधारक ने तुरंत बैंक को सूचना दी

  • बैंक रकम वापस करने में विफल रहा

  • जिला और राज्य उपभोक्ता आयोग ने बैंक को दोषी ठहराया


🔍 सिस्टम फेलियर या हैकिंग का मामला

एनसीडीआरसी ने कहा कि:

  • लेनदेन का समय और प्रकृति

  • इस ओर स्पष्ट संकेत करते हैं कि

    • यह बैंकिंग सिस्टम की गड़बड़ी

    • या हैकिंग का मामला है

जिसका शिकार शिकायतकर्ता बनी।


📜 RBI सर्कुलर 2017 का हवाला

आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वर्ष 2017 के सर्कुलर को स्पष्ट करते हुए कहा:

  • खाताधारक द्वारा

    • OTP साझा करने का कोई सबूत बैंक पेश नहीं कर सका

  • मामला RBI सर्कुलर के क्लॉज 6(a) के अंतर्गत आता है

  • जिसमें खाताधारक की ‘Zero Liability’ (शून्य देयता) तय की गई है


⏱️ 10 कार्य दिवस में पैसा लौटाना अनिवार्य

पीठ ने दो टूक कहा:

  • यदि खाताधारक की कोई लापरवाही नहीं है

  • और उसने समय पर सूचना दी है
    👉 तो बैंक को 10 कार्य दिवसों में पूरी राशि लौटानी होगी

आयोग ने बैंक को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी माना।


⚠️ उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब?

इस फैसले से उपभोक्ताओं को बड़ा संरक्षण मिला है:

  • OTP साझा नहीं किया → बैंक जिम्मेदार

  • तुरंत शिकायत की → Zero Liability

  • देरी की → बैंक दोषी


📌 निष्कर्ष (Conclusion)

NCDRC का यह फैसला बैंकिंग उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है।
अब साफ है कि साइबर फ्रॉड या अनधिकृत लेनदेन की स्थिति में, यदि खाताधारक निर्दोष है, तो बैंक जिम्मेदारी से नहीं बच सकता