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समायोजन 3.0 पर बढ़ा विवाद, पुराने स्कूलों में फिर भेजे गए शिक्षक, नियमों की अनदेखी का आरोप

समायोजन 3.0 अब विधान परिषद तक पहुंच गया है। इस प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। आरोप है कि समायोजन 2.0 के दौरान जिन स्कूलों से शिक्षकों को हटाया गया था, उसी तरह के स्कूलों में उन्हें दोबारा भेज दिया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि समायोजन 3.0 में महिला और दिव्यांग शिक्षकों से विकल्प तक नहीं लिए गए, जबकि नियमों के अनुसार इन्हें विशेष श्रेणी में रखा जाना चाहिए। बिना सहमति और विकल्प के स्थानांतरण से इन वर्गों के शिक्षकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा यू-डायस पोर्टल में भी नए स्कूल दर्शा दिए गए हैं, जिससे शिक्षकों की पदस्थापना और कार्यस्थल को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। कई मामलों में वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज जानकारी में अंतर बताया जा रहा है।

शिक्षकों का आरोप है कि समायोजन की यह प्रक्रिया न तो व्यावहारिक है और न ही शिक्षक हितैषी। इसी कारण मामला अब विधान परिषद तक पहुंचा है, जहां इस पर चर्चा और हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।

समायोजन 3.0 को लेकर उठ रहे सवाल यह संकेत देते हैं कि यदि प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया तो आगे भी विरोध और कानूनी अड़चनें बढ़ सकती हैं। शिक्षक संगठन जल्द ही इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।

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