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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगा उच्च शिक्षा निदेशक का चयन, प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच बड़ा फैसला

 प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा निदेशक के चयन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब यह प्रक्रिया मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के माध्यम से पूरी की जाएगी। शासन के विशेष सचिव गिरीश कुमार त्यागी ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पहले जारी आदेशों पर उठे सवालों और न्यायिक टिप्पणी के बाद शासन ने चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है।

विशेष सचिव द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उच्च शिक्षा निदेशक का चयन अब उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा (समूह ‘क’) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली–2008 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। इसके तहत चयन समिति का गठन होगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे।

क्या है पूरा मामला

31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को शासनादेश के माध्यम से प्रभार दिया गया था। हालांकि उनकी पात्रता को लेकर प्रश्न उठे, जिसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। न्यायालय में यह तर्क दिया गया कि डॉ. शर्मा की नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं है।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की पात्रता को चुनौती देने के लिए जनहित याचिका (PIL) उपयुक्त माध्यम नहीं है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में व्यक्तिगत या सेवा संबंधी विवादों को नियमित याचिका के जरिए ही उठाया जाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने PIL को नियमित याचिका में परिवर्तित करने की अनुमति दी, लेकिन मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

शासन का अगला कदम

हाईकोर्ट के रुख के बाद शासन ने चयन प्रक्रिया की समीक्षा की और संशोधित प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए नया पत्र जारी किया। अब उच्च शिक्षा निदेशक का चयन नियमों के अनुसार गठित चयन समिति द्वारा किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी या प्रशासनिक विवाद न रहे।

इस फैसले को उच्च शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और नियमसम्मत नियुक्ति की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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