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यूजीसी के नियमों के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, बताया यह है काला कानून

 बरेली। शंकराचार्य और उनके शिष्यों के कथित अपमान और यूजीसी के नए रेगुलेशन के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गणतंत्र दिवस के दिन दिए गए इस इस्तीफे से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। 



विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए रेगुलेशन के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है।

सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने फेसबुक और एक्स पर तस्वीरें पोस्ट कीं। इनमें वह अपने आवास के बाहर पोस्टर पकड़े दिखे, जिस पर ‘यूजीसी रोलबैक’ और ‘शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे नारे लिखे थे।

पोस्ट कुछ ही देर में वायरल हो गई। मीडिया से कहा कि यूजीसी नियम रोलेट एक्ट की तरह दमनकारी है।

अधिकारी समझाने पहुंचे: एडीएम सिटी सौरभ दुब समेत कई वरिष्ठ अफसर सिटी मजिस्ट्रेट के सरकारी आवास पर उन्हें समझाने पहुंचे। हालांकि, सिटी मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्तीफा वापस नहीं लेंगे।

उधर,डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि उन्हें इस्तीफे का कोई औपचारिक पत्र या ई-मेल नहीं मिला है।

यूजीसी नियम पर विवाद क्यों: बता दें कि यूजीसी ने धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान और दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव रोकने को हर विश्वविद्यालय और कालेज में इक्विटी सेंटर बनाना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग का कहना है कि नया नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है।


डीएम आवास पर बंधक बनाने का आरोप लगाया
देर शाम सिटी मजिस्ट्रेट अग्निहोत्री डीएम से मिलने गए। बाहर निकलकर कहा कि उन्हें एक घंटे बंधक बनाकर रखा गया। आरोप लगाया कि डीएम ने लखनऊ में किसी से बात की, जिसने ब्राह्मणों के लिए आपत्तिजनक शब्द कहा। दो घंटे में आवास खाली करने के लिए धमकाया गया।

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि माघ मेले में शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह निंदनीय है। आरोप लगाया कि प्रकरण में स्थानीय प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की।

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