प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नाबालिग की आयु निर्धारण में शैक्षणिक दस्तावेज़ सबसे अहम हैं। यदि दस्तावेजों संदिग्धता है या स्पष्टता का अभाव है तब अस्थि परीक्षण के द्वारा आयु
निर्धारण किया जा सकता है। मगर इस प्रकार किए गए निर्धारण में दो वर्ष ऊपर और नीचे की आयु गणना की संभावना होती है जिसका लाभ नाबालिग के पक्ष में जाएगा। कोर्ट ने नाबालिगता से जुड़े मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, प्रयागराज द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए मामले पर कानून के अनुसार पुनः विचार करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने नाबालिग की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।मामला एक नाबालिग बनाम राज्य सरकार एवं अन्य से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नाज़िया नफीस ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से अपर सरकारी अधिवक्ता राजीव कुमार एवं विपक्षी पक्ष की ओर से कृष्ण कुमार मिश्रा उपस्थित रहे।

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