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4 अप्रैल महारैली का ऐलान: शिक्षकों का आर-पार आंदोलन, लखनऊ बैठक में बड़े फैसले

*22 मार्च 2026 को "शिक्षक भवन" रिसालदार पार्क लखनऊ में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय नेतृत्व में आयोजित प्रदेश के समस्त जनपदों के अध्यक्ष तथा मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में दिये गये दिशा-निर्देश-*



1. *4 अप्रैल 2026 की महारैली का लक्ष्य*
4 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सान्निध्य में शिक्षकों की महारैली का आयोजन किया जायेगा। 
इस रैली में प्रत्येक मंडल में जनपद वार, ब्लॉक वार बसों के माध्यम से शिक्षकों की भागीदारी को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 


2. *रैली परमिशन एवं अडिग स्थिति*
रैली की आवश्यकता अनुमति (परमिशन) प्राप्त करने के लिये पूर्ण प्रयास किया जायेगा, किंतु यदि अनुमति नहीं मिलती है तो भी संगठन रैली आयोजन से पीछे नहीं हटेगा और आंदोलनकारी रूप में रैली का आयोजन अडिग रहेगा। 


3. *बसों की रोकथाम पर धरना एवं प्रदर्शन*
यदि पुलिस द्वारा बसों को किसी भी स्थान पर रोका जाता है, तो रोके गए स्थल पर शिक्षक तत्काल धरना एवं प्रदर्शन शुरू करेंगे और आंदोलन की गति वहीं से जारी रखी जायेगी। 


4. *प्रांतीय नेतृत्व का स्पष्ट निर्देश*
प्रांतीय नेतृत्व के अनुसार यह आंदोलन शिक्षकों के मान–सम्मान और आजीविका की रक्षा के लिए किया जाने वाला एक “आर–पार” का युद्ध है।
यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जो शिक्षक इस लड़ाई में बिना झिझक लड़ने की क्षमता रखते हैं, उन्हें ही संगठन के साथ रहना चाहिए; अनावश्यक चाटुकारिता या भागने वाले तत्वों को संगठन छोड़कर अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता है। 


5. *दिल्ली की सड़क और अन्य संगठनों पर प्रभाव*
यह माना जा रहा है कि जब शिक्षक दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे तथा केंद्र स्तर पर आंदोलन करेंगे, तो अन्य संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा शिक्षकों के विरुद्ध दिए जाने वाले बयानों के प्रति उनका तथा सरकार का नज़रिया बदलेगा। 


इतिहास इस बात से साक्ष्य प्रदर्शित करता है कि जो समूह चुपचाप झुककर बैठता है, उसी पर अधिकांश अत्याचार टिकते हैं; इसलिए प्रतिरोध न करना, अपनी क्षति को निमंत्रण देने के समान है। 


6. *सुप्रीम कोर्ट में TET रिव्यू एवं निर्देश*
वर्तमान में TET मुद्दे से संबंधित विभिन्न संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कुल 38 रिव्यू पिटीशनें दाखिल की जा चुकी हैं। ��


कोर्ट रिव्यू पिटीशन में कमी पाए जाने पर उसे डिफेक्ट मानकर 90 दिनों की अवधि के लिए वापस भेज देता है, जिससे मुख्य मामले पर अग्रिम सुनवाई रुक जाती है। 
चूंकि लगातार फरवरी–मार्च 2026 तक भी नई रिव्यू पिटीशनें दाखिल की जा रही हैं, इससे मामले की कार्यवाही निरंतर बाधित हो रही है। संगठन शीघ्र ही एक लिखित प्रार्थना पत्र दाखिल करेगा कि रिव्यू दाखिल करने के लिए एक निश्चित तिथि या सीमा निर्धारित की जाये, ताकि यह महत्वपूर्ण मामला कोर्ट में आगे बढ़ सके। 

7. *रिव्यू दाखिल करने में राजनीति और पारदर्शता*
रिव्यू दाखिल करने में कोई विशेष “कलाकारी” या जटिल नियम नहीं है; वास्तव में उसके साथ वकालत नामा संलग्न करके रिव्यू पिटीशन कोर्ट में दाखिल की जा सकती है। 


कुछ संगठन रिव्यू दाखिल करने के मोड़ पर भी आंतरिक या प्रचारात्मक राजनीति कर रहे हैं, जबकि आपका संगठन इस पूरे विषय में पूर्ण रूप से जागरूक और सावधान रहने की स्थिति में है। 

8. *2005 में नियुक्त परिषदीय शिक्षकों की पुरानी पेंशन*
2005 में नियुक्त परिषदीय शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन (OPS) लागू कराने की लड़ाई लगातार चल रही है। 

आश्चर्य की बात है कि पिछले दिनों सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त विषय विशेषज्ञों (Subject Specialists) के लिए पुरानी पेंशन लागू कर दी है, जबकि 2005 में नियुक्त परिषदीय शिक्षकों के साथ उनके अधिकारों का उल्लंघन करते हुए उन पर लगातार उत्पीड़न का वातावरण बनाया हुआ है। 


9. *जनपद‑स्तर पर सदस्यता धनराशि और कार्यवाही*
समस्त जनपदों को निर्देशित किया गया है कि जो सदस्यता धनराशि पूर्व में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार है, उसे प्रदेश कोष में शीघ्र जमा कराना सुनिश्चित करें। 
इस उद्देश्य से 29 मार्च 2026 को अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। यदि किसी जनपद द्वारा निर्धारित तिथि तक सदस्यता शुल्क जमा नहीं किया गया, तो 4 अप्रैल 2026 की महारैली के पश्चात् समीक्षा करके उस जनपदीय नेतृत्व के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही की जाएगी, जिसका पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित जनपदीय नेतृत्व पर होगा। 


10. *पूर्व‑महारैली डिजिटल आंदोलन (#हैशटैग)*
4 अप्रैल 2026 की महारैली से पूर्व, टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के नेतृत्व में X (पूर्व Twitter) प्लेटफॉर्म पर पूरे देश के शिक्षकों के माध्यम से एक विशाल डिजिटल आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया है

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