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एसआईआर ड्यूटी के दबाव में शिक्षामित्र ने की आत्महत्या, बेटी की शादी से पहले नहीं मिली छुट्टी

फतेहपुर के बिंदकी तहसील में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) ड्यूटी के दबाव में एक और दर्दनाक घटना सामने आई है।

परिषदीय प्राथमिक विद्यालय आलियाबाद में तैनात शिक्षामित्र और बीएलओ अखिलेश कुमार सविता ने स्कूल के एक कमरे में पंखे के हुक से रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

बेटी की शादी से पहले नहीं मिली छुट्टी

परिजनों के अनुसार अखिलेश कुमार सविता की बेटी की शादी 8 मार्च को तय थी। शादी की तैयारियों के लिए उन्होंने छुट्टी मांगी थी, लेकिन उन्हें एसआईआर ड्यूटी के कारण छुट्टी नहीं मिल रही थी।

बताया जा रहा है कि लगातार काम के दबाव और मानसिक तनाव के चलते वे बेहद परेशान थे।

सुसाइड नोट में अधिकारियों पर आरोप

मौके से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने एसआईआर ड्यूटी से “जीवन मुक्ति” की बात लिखी है। साथ ही उन्होंने एसडीएम बिंदकी और बीईओ को जिम्मेदार ठहराया है।

नोट में यह भी लिखा गया है कि भारी काम के कारण उन्हें रोज केवल दो घंटे ही सोने का समय मिल पा रहा था।

फतेहपुर में दूसरी बड़ी घटना

यह मामला फतेहपुर में एसआईआर से जुड़ी दूसरी बड़ी त्रासदी माना जा रहा है। इससे पहले बिंदकी तहसील के खजुहा बागबादशाही में तैनात लेखपाल सुधीर कुमार ने भी शादी से ठीक पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

उस समय भी परिजनों ने एसआईआर ड्यूटी और छुट्टी न मिलने को इसकी वजह बताया था।

प्रदेश में बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं

प्रदेश के कई जिलों — मुरादाबाद, गोंडा और बरेली — में भी एसआईआर अभियान के दौरान बीएलओ और शिक्षामित्रों की मौत के मामले सामने आए हैं।

इनमें आत्महत्या, दिल का दौरा और अत्यधिक तनाव जैसी घटनाएं शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि काम का बोझ, नींद की कमी और पारिवारिक जिम्मेदारियां उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रही हैं।

उठ रहे गंभीर सवाल

लगातार हो रही घटनाओं के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत निर्वाचन आयोग और प्रशासन द्वारा बीएलओ पर अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है।

शिक्षामित्र और बीएलओ संगठनों ने मांग की है कि मानवीय आधार पर छुट्टी और राहत की व्यवस्था की जाए। साथ ही उनकी मांग “हमारी पहचान, हमारा अधिकार” आंदोलन के रूप में और तेज हो गई है।

जांच और कार्रवाई की मांग

परिजनों और स्थानीय लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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