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टीईटी से हजारों सरकारी शिक्षक भी बाहर, जानिए क्या है यह मामला और कौन कौन से हुए TET से बाहर

प्रयागराज। पांच साल बाद होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने हजारों सरकारी शिक्षकों को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कक्षा एक से आठ तक के सभी सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य माना है। यही कारण है कि यूपी-टीईटी में भी पहली बार सेवारत शिक्षकों को शामिल किया गया है।


हालांकि चयन आयोग की ओर से जारी गाइडलाइन में उच्च प्राथमिक

स्तर की टीईटी में बीएड के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को तो आवेदन का मौका दिया गया है, लेकिन डीपीएड, बीपीएड और सीपीएड के आधार पर विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से चयनित और वर्तमान में कक्षा छह से आठ में पढ़ा रहे परिषदीय शिक्षकों को बाहर


कर दिया है। यह स्थिति तब है जब अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी और उर्दू बीटीसी को समकक्ष माना है। 2013 में आई उच्च प्राथमिक स्तर पर 29334 गणित और विज्ञान भर्ती में भी विशिष्ट बीटीसी करने वाले

अभ्यर्थियों को भी मौका दिया गया था। लेकिन यूपी-टीईटी 2026 से बाहर होने के कारण ये शिक्षक परेशान हैं, क्योंकि टीईटी नहीं करने पर इनकी नौकरी चली जाएगी।


इसी प्रकार प्राथमिक स्तर पर पढ़ा रहे बीपीएड, डीपीएड और सीपीएड

योग्यताधारी शिक्षक उच्च प्राथमिक स्तर पर पदोन्नति भी नहीं पा सकेंगे, क्योंकि इन्हें शामिल नहीं किया गया है। उत्तर प्रदेश में 1999, 2004 और 2007-08 में विशिष्ट बीटीसी के प्रशिक्षण के चयन में बीएड के साथ-साथ बीपीएड, सीपीएड और डीपीएड वालों को मौका दिया गया था। इसके आधार पर हजारों अभ्यर्थी परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए थे।


उसके बाद आरटीई 2009 लागू हो गया। केंद्र सरकार ने शिक्षकों की अर्हता निर्धारित करने के लिए एक अप्रैल 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को अधिकृत किया था। 23 अगस्त 2010, 29 जुलाई 2011 और 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना के माध्यम से एनसीटीई ने शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति की अर्हता निर्धारित की थी।


दो साल के अंदर पास करनी है टीईटी

सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर के अपने आदेश में 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सरकारी शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य माना था। सेवा में बने रहने के लिए दो वर्ष के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करने के आदेश दिए हैं। पदोन्नति के लिए उस संवर्ग की टीईटी को अनिवार्य बताया है। केवल उन्हीं शिक्षकों को राहत दी है जिनकी पांच वर्ष से कम की सेवा बाकी है।


सेवारत शिक्षकों को देनी होगी सैलरी स्लिप

यूपी-टीईटी के ऑनलाइन आवेदन में सरकारी शिक्षकों को अपनी नवीनतम सैलरी स्लिप (वेतन पर्ची) भी अपलोड करनी होगी। इसके अलावा अन्य आवश्यक विवरण जैसे शिक्षक का प्रकार, संगठन/विद्यालय का नाम, ज्वॉइनिंग तिथि, सेवानिवृत्ति तिथि तथा मानव संपदा कोड भी भरना होगा।

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