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जाते-जाते 143 पदोन्नत शिक्षकों की तैनाती बदल गए बीएसए, आरोप, नियमों को ताक पर रखकर हुआ संशोधन

पिछले दिनों गोंडा के लिए स्थानांतरित बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार सिंह ने पदोन्नति पाने वाले 143 शिक्षकों की तैनाती बदल दी। आरोपित है कि इन शिक्षकों को वापस नजदीक के विद्यालयों में नियुक्त कर दिया।

सारी कवायद पूर्व की तिथि (बैक डेट)में की गई। नवनियुक्त बीएसए ने आरोपों की जांच करने की बात कही है। 1जिले के प्राइमरी स्कूलों के सात सौ से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति अर्से से लंबित थी। पूर्व बीएसए अजय कुमार सिंह ने दिव्यांग व महिला शिक्षक शिक्षिकाओं की काउंसिलिंग कराकर विकल्प पत्र भरवाया था। पांच सितंबर को बीएसए का तबादला गोंडा हो गया।
इसके बाद भी वह जिले में जमे रहे और नौ सितंबर को प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत 716 शिक्षकों की पदोन्नति कर कमेटी के सदस्यों की सहमति से सूची जारी कर दी। खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से शिक्षकों को पदोन्नति का आदेश 14 सितंबर तक दे दिया गया था। पदोन्नति पाने वालों में 242 शिक्षिकाएं हैं। अधिकांश शिक्षकों को उनकी वर्तमान तैनाती वाले स्थल से 50 से 97 किमी दूर भेजा गया था। सड़वा चंडिका और बेलखरनाथधाम जैसे ब्लाक के शिक्षकों को कालाकांकर ब्लाक में कौशांबी सीमा पर तैनात कर दिया गया था। यही हाल उस तरफ के शिक्षकों का हुआ। किसी को पट्टी तो किसी को आसपुरा देवसरा में तैनाती दी गई। पदोन्नत शिक्षकों ने जुगाड़ लगाना शुरू किया तो कई शिक्षक नेता व कार्यालय कर्मी बिचौलिए बन कर सामने आ गए। बीती 19 सितंबर को 143 शिक्षकों की तैनाती में संशोधन कर दिया गया। संशोधित तैनाती का आदेश 15 सितंबर की तारीख में ही जारी कर दिया गया। 1नियमों की उड़ी धज्जियां :शिक्षक नेताओं का कहना है कि तैनाती में संशोधन में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। पदोन्नति के बाद तैनाती में संशोधन करने से पूर्व पदोन्नति कमेटी को कोई जानकारी नहीं दी गई। पदोन्नति के समय शिक्षकों को 15 दिन के भीतर स्कूलों में अपना योगदान करने का आदेश दिया गया था। 15 दिन के बाद ही संशोधन होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। संशोधित आदेश में विभाग के किसी बाबू के हस्ताक्षर नहीं कराए गए। रोस्टर का पालन नहीं हुआ। वैसे अधिकारियों का दावा था कि रोस्टर के अनुसार पदोन्नति की गई है।
शिक्षक संघ जुटा रहा साक्ष्य :प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल व मंत्री विनय सिंह का कहना है कि ब्लाकों से साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं। उधर नए बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह का कहना है कि पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों का संशोधन कम से कम 10 दिनों के बाद होना चाहिए। यदि कोई गड़बड़ी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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