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सीधी भर्ती बन्द, फिर भी टीईटी: उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती पर रोक के प्रस्ताव के बाद भी जूनियर टीईटी के लिए माँगा आवेदन

मानदेय मांगने पर खुल गई पोल, मची खलबली
संवाद सहयोगी, हाथरस : गलत तरीके से नौकरी करने वाले शिक्षक व अन्य संविदा कर्मचारियों की कोई कमी बेसिक शिक्षा विभाग में नहीं है।
मेरिट में आए बिना तत्कालीन बीएसए के नियुक्ति पत्र पर सादाबाद ब्लाक के नगला भूचा में तैनात एक अनुदेशक की पोल तब खुली जब सात माह तक मानदेय नहीं मिलने पर शिकायत करने पहुंच गया। अब बीएसए के स्तर से तत्कालीन बीएसए और पटल सहायक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
आठ माह पूर्व शासन के निर्देश पर उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अनुदेशकों की तैनाती कराई गई थी। जितेन्द्र कुमार की तैनाती सादाबाद ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगला भूचा में कृषि विषय को लेकर हुई थी। आठ माह से अनुदेशक विद्यालय में नियमित कार्य कर रहा है। विगत दिनों अनुदेशक अपने मानदेय की खातिर बीआरसी केंद्र सादाबाद पर पहुंचा, जहां उसने बिल बाबू से मानदेय की खातिर पूछताछ की। बिल बाबू ने उक्त अनुदेशक से अपने कागजात और नियुक्ति पत्र लाने के लिए कह दिया। अनुदेशक के नियुक्ति पत्र को देखकर वो चौंक गया, क्योंकि सादाबाद ब्लाक में 28 अनुदेशकों की तैनाती हुई थी, जिसमें इसका नाम नहीं था। आखिरकार यह एक और अनुदेशक कहां से आ गया। नियुक्ति पत्र पर तत्कालीन बीएसए देवेन्द्र गुप्ता और पटल सहायक गजेन्द्र के हस्ताक्षर थे। खंड शिक्षा अधिकारी ने उक्त अनुदेशक को बीएसए कार्यालय जाकर संपर्क करने के लिए कह दिया। बीएसए कार्यालय पर जब अनुदेशक आया तो पूरी पोल खुल गई, क्योंकि कृषि वर्ग में मेरिट 62 प्रतिशत पर रुकी थी, जबकि अनुदेशक की मेरिट 61 प्रतिशत थी।
इनकी सुनो
प्रकरण संज्ञान में आया है। तत्कालीन बीएसए और पटल सहायक को नोटिस जारी करके जवाब मांगा जा रहा है। उसी के बाद कार्रवाई तय की जाएगी।

रेखा सुमन, बीएसए, हाथरस।
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