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सम्बद्ध प्राइमरी अब भी मदद के इंतजार में

सम्बद्ध प्राइमरी अब भी मदद के इंतजार में, सितम्बर 2014 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश.. अक्तूबर, 2015 में
शासनादेश.. लेकिन आदेश का पालन अब भी अधूरा
सितम्बर 2014 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश.. अक्तूबर, 2015 में शासनादेश.. लेकिन आदेश का पालन अब भी अधूरा। यह हाल है सूबे के बेसिक शिक्षा विभाग का। वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सहायताप्राप्त जूनियर हाईस्कूलों से सम्बद्ध प्राइमरी स्कूलों को भी सरकारी सहायता देने का फैसला सुनाया था लेकिन इस पर अमल अब भी नहीं हो पाया है।विभाग बार-बार जिलों को पत्र भेज रहा है। तयशुदा मानकों पर रिपोर्ट मांग रहा है ताकि तय किया जा सके कि स्कूल सरकारी इमदाद मिलने लायक है या नहीं लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं भी नहीं रेंग रही। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में एक आदेश जारी कर सहायताप्राप्त जूनियर स्कूलों से संबद्ध प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को भी सरकारी वेतन देने का आदेश जारी किया था। प्रदेश में ऐसे 250 स्कूलों की सूचना है जिनके जूनियर सेक्शन सहायताप्राप्त हैं। इनमें पढ़ा रहे शिक्षकों को सरकारी वेतन दिया जा रहा था जबकि प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी वेतन नहीं मिल रहा था। शिक्षकों ने इसी आधार पर याचिका की थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला दिया था। इस पर अमल करते हुए 2015 में शासनादेश जारी किया गया था। बीएसए को निरीक्षण कर बताना होगा कि सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल किस वर्ष में अनुदान सूची पर लिया गया। वहीं उसका प्राइमरी विभाग साथ ही खुला था या फिर बाद में। दोनों स्कूल में एक ही प्रधानाचार्य होने का प्रमाण देना होगा। मानकों पर परीक्षण के बाद ही प्राइमरी के शिक्षकों को सरकारी वेतन दिया जाएगा।

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