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शिक्षा मित्र तभी तक बचे हुए हैं जब तक जज साहब सुनना नही चाहते : मोहम्मद अरशद, बीटीसी लीडर

शिक्षामित्र प्रशिक्षण मुद्दा..अवैध ट्रेनिंग की रिट 28004/2011 की रिट गलत तरीके से 12 सितंबर 2015 को खारिज की गयी । पहले इस याचिका मे अन्य मुद्दों से जुड़ी याचिकए जोड़ी गयी । ये काम इलाहाबाद के न्यायाधीशों द्वारा किया गया और ऑर्डर रिजर्व करके 6 - 6 माह तक ऑर्डर नही दिया गया ।

शिक्षा मित्रों के मानदेय , चयन , बर्खास्तगी जैसे तमाम मामलों को 28004/2011 मे जोड़ कर इस रिट की मुख्य बात अवैध ट्रेनिंग को दबा कर अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी गयी ।
अवैध समायोजन मामले मे सुनवाई के दौरान अशोक खरे ने बहस 28004/2011 से शुरू की । अवैध समायोजन मामले मे ऑर्डर जस्टिस चंद्रचूड़ मे open court मे लिखवाया मगर ट्रेनिंग का ऑर्डर चैंबर से लिख कर आया और गलत तथ्यों को वजह बनाकर रिट खारिज की गयी ।
ट्रेनिंग से जुड़ी कोई रिट यदि खारिज होती है इसका ये मतलब नही की ट्रेनिंग वैध है । सुप्रीम कोर्ट मे जिस दिन जज ने मामले की सुनवाई चालू की सरकार चारो खाने चित होकर पानी मांगेगी । शिक्षा मित्र तभी तक बचे हुए हैं जब तक जज साहब सुनना नही चाहते । अब ये रिट अशोक तिवारी 19837 sc मे 4347 से टैग है अतः अच्छे सीनियर द्वारा इनकी ट्रेनिंग पर जोरदार प्रहार किया जाये ।
(सूचना द्वारा मोहम्मद अरशद, बीटीसी लीडर)
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