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Firstpost : अखिलेश सरकार में भर्ती हुए 2 लाख से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी पर मंडराने लगा खतरा

सूबे में सरकारी नौकरियों पर सीएम योगी आदित्यनाथ की नजर टेढ़ी हो गई है. यही वजह है कि बेसिक शिक्षा विभाग में 2.37 लाख शिक्षकों की नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है. आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर रेवड़ियों की तरह से नौकरी बांटी गई हैं.
इतना ही नहीं अखिलेश-मायावती शासनकाल की दरोगा-सिपाही भर्ती भी निरस्त हो सकती है.
सीएम बनते ही योगी आदित्यनाथ ने 23 तरह की भर्तियों पर रोक लगा दी है. इसमें से 22 भर्ती उच्च शिक्षा में सहायक प्रोफेसर से जुड़ी हुई हैं. प्रक्रिया के तहत करीब चार हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है. वहीं बेसिक शिक्षक विभाग में 48 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को रोक दिया गया है. इस प्रक्रिया में अनुदेशकों के पद भी शामिल हैं.
बेसिक शिक्षा के 2.37 लाख पदों पर चल सकता है डंडा
बेशक सीएम बेसिक शिक्षा विभाग में 48 हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा चुके हैं. लेकिन 2.37 लाख शिक्षक पदों पर भी खतरा मंडरा रहा है. जानकारों की मानें तो 1.65 लाख शिक्षकों के वो पद हैं जिन पर शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया है. शिक्षा का अधिकार एक्ट को किनारे कर बिना टीईटी पास शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर नियुक्ति दे दी गई है.
दूसरी ओर साल 2011 में 72 हजार शिक्षक पदों पर हुई शिक्षकों की नियुक्ति पहले से ही विवादों में चल रही है. आरोप है कि शिक्षकों के टीईटी परीक्षा परिणाम में छेड़छाड़ की गई है. इस संबंध में शिक्षा निदेशक को जेल भी हुई थी. कई बार परीक्षा परिणाम बदला भी गया था. लेकिन अभी तक मामले में निपटारा नहीं हो पाया है.
दरोगा-सिपाही भर्ती पर भी होगी खास नजर
बीएसपी के शासनकाल 2011 में यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती प्रक्रिया शुरु हुई थी. 4010 पदों पर भर्ती होनी थी. लेकिन 2012 में एसपी की सरकार आने के बाद भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए भर्ती पर रोक लगा दी गई. जबकि प्रक्रिया के तहत चुने गए उम्मीदवार ट्रेनिंग कर रहे थे. इसी तरह 30 हजार पुलिस सिपाही भर्ती प्रक्रिया भी शक के दायरे में है. आशंका जताई जा रही है कि नजर पड़ते ही नए सीएम कभी भी इस भर्ती पर भी रोक लगा सकते हैं.
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