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योगी सरकार के सौ दिनः भर्तियों के भ्रष्टाचार पर उम्मीदें बरकरार

90 दिन की तय अवधि में भर्तियां भले ही शुरू न हो सकी हों, लेकिन सरकार भ्रष्टाचार रोकने को जिस दिशा में बढ़ रही है उससे आने वाले दिनों में बेरोजगारों के दिन बहुरने की उम्मीद बरकरार
[धर्मेश अवस्थी] इलाहाबाद। 22 मार्च को उप्र लोकसेवा आयोग में चल रही 22 भर्तियों को एकाएक रोका गया। अगले दो दिनों में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, प्राथमिक व राजकीय शिक्षकों और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग समेत लगभग सारी भर्तियां ठप हो गई। यह खबर प्रदेश भर के बेरोजगारों को हैरान करने के बजाय काफी सुकून देने वाली रही। युवाओं में इस चर्चा ने जोर पकड़ा कि भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार की जांच होगी और वादे के मुताबिक नियुक्तियां पारदर्शी से तरीके से होंगी।
इसी बीच कुछ आयोगों व चयन बोर्डों को भंग करने की भी चर्चाएं उठती रहीं। पिछले माह अधीनस्थ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजकिशोर यादव के इस्तीफे से बड़ा बदलाव होने को बल मिला। 90 दिन की तय अवधि में भर्तियां भले ही शुरू न हो सकी हों, लेकिन सरकार भ्रष्टाचार रोकने को जिस दिशा में बढ़ रही है उससे आने वाले दिनों में बेरोजगारों के दिन बहुरने की उम्मीद बरकरार है। राजकीय कालेजों में एलटी ग्रेड शिक्षकों की नौ हजार भर्तियां मेरिट के बजाय लिखित परीक्षा से कराने की मांग सरकार ने पूरी कर दी है।
साथ ही यह संकेत भी दे दिया कि वह युवाओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने को तत्पर है। उप्र लोकसेवा आयोग में सीसैट प्रभावित अभ्यर्थियों को दो अतिरिक्त अवसर की मांग सरकार ने सत्ता में आने के चंद दिनों में ही पूरी कर दी है।

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र में नियुक्तियां ठप होने पर हाईकोर्ट ने बीते माह सरकार से जवाब मांगा। हलफनामे में भर्तियों को लेकर सरकार की सोच व चल रही तैयारियों का विस्तार से जिक्र है। यह जरूर है कि युवा आयोगों व चयन बोर्डों में एक लाख से अधिक ठप पड़ी भर्तियों से धुंध छंटने की राह बेसब्री से देख रहे हैं।
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