लखनऊ : राजधानी में कितने अमान्य स्कूल चल रहे हैं? कहां चल रहे हैं? और
कितने वर्षो से चल रहे हैं? इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं है। अब जब
जिलाधिकारी ने अमान्य स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी किए तब
शिक्षाधिकारी सक्रिय हुए।
डीआइओएस व बीएसए अब अमान्य स्कूलों की खोज कर रहे
हैं। स्थिति यह है कि अमान्य स्कूलों की खोज के लिए दोनो अधिकारियों को
मान्य स्कूल का सहारा लेना पड़ रहा। 1जिलाधिकारी कौशलराज के निर्देश के बाद
शिक्षाधिकारी एक्शन में आए। निर्देश के तहत 30 जून तक इन स्कूलों को बंद
करने के लिए अधिकारियों ने दम भरा। इस अवधि के बाद अभियान चलाकर अमान्य
स्कूलों को बंद कराने इरादा भी है, लेकिन इसी बीच शिक्षक संगठन ने भी कई
सवाल खड़े कर दिए। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक संरक्षक डॉ. आरपी
मिश्र ने कहा कि आखिर अब तक अमान्य स्कूल किसकी शह पर संचालित हो रहे?
अमान्य स्कूलों पर कार्रवाई के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद व जिलाधिकारी के
आदेश का इंतजार क्यों किया जाता रहा? उनका कहना है कि जिले में अमान्य
स्कूलों की बड़ी तादाद है। शिक्षक संगठन लंबे समय से अमान्य स्कूलों के
खिलाफ कार्रवाई की आवाज उठाता रहा, कई बार कार्रवाई का दावा भी किया गया,
मगर हर बार सारे दावे कागजों पर ही रहे।
डीआइओएस व बीएसए ने स्कूल प्रबंधक के साथ की बैठक : डीआइओएस डॉ. मुकेश
कुमार व बीएसए डॉ. अमरकांत ने गुरुवार को सरोजनी नगर व मोहनलालगंज ब्लॉक
में मान्यता प्राप्त स्कूल प्रबंधक व प्रधानाचार्यो के साथ बैठक की।
डीआइओएस ने प्रधानाचार्यो से बच्चों को दाखिला दिलाने में अभिभावकों की मदद
करने की अपील की।
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