इलाहाबाद : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिन पहले शिक्षामित्रों को
मूल विद्यालयों में भेजने का विकल्प देने का निर्देश दिया। बेसिक शिक्षा
महकमे ने दूसरे ही दिन शासनादेश जारी कर दिया और प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इसका असर यह रहा कि समायोजन रद होने के बाद जो शिक्षामित्र व उनके संगठन के
नेता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, उन्होंने आगे आकर आभार जताया। अब इससे भी
एक कदम आगे बढ़कर शिक्षामित्र संघ उप्र ने मांग की है कि गलत नियमावली
बनाकर समायोजन करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही वर्षो से
स्कूलों में पढ़ा रहे प्रशिक्षित स्नातकों को नियमित करने का सरकार रास्ता
खोजे।
प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह
शनिवार को इलाहाबाद आए। शिक्षामित्र संघ उप्र का प्रतिनिधिमंडल शिवपूजन
सिंह की अगुआई में उनसे मिला। संघ ने अनुरोध किया कि सरकारी विभागों में
अस्थाई रूप से कार्य करने वालों की सेवाओं को देखते हुए नियमित करने की
परंपरा लंबे समय से रही है। बेसिक शिक्षा के स्कूलों में शिक्षामित्र वर्षो
से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षामित्र हैं, जो
प्रशिक्षित स्नातक हैं। उन्हें सरकार अब नियमित करने का रास्ता खोजे।
शिक्षामित्रों ने कहा कि कई समस्याओं व आर्थिक तंगी से उनके साथी मानसिक
पीड़ा के दौर से गुजर रहे हैं। इसका हल सरकार की निकाल सकती है। यह भी
बताया कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका की सुनवाई करते हुए 22 फरवरी 2018 को
आदेश दिया कि प्रशिक्षित स्नातकों को पैरा टीचर के रूप में 38878 रुपये का
प्रतिमाह भुगतान किया जाए। यह प्रकरण भी शासन में लंबित है।
शिक्षामित्रों ने मंत्री से कहा कि एनसीटीई और मानव संसाधन विकास मंत्रालय
के नियमों की अनदेखी करके गलत नियमावली के तहत उन लोगों का समायोजन किया
गया, जिसे पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना।
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