एक 37 वर्षीय सरकारी शिक्षक, कृष्ण मोहन सिंह, जिनका पोस्टिंग Deoria जिले के गौरी बाजार ब्लॉक के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में थी, ने शनिवार (21 फरवरी 2026) को Gorakhpur में अपने भाई के घर में
आत्महत्या कर ली। उनके पास से एक 4-पेज सुसाइड नोट और एक वीडियो संदेश मिला, जिसमें उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।📍 आत्महत्या के पीछे क्या वजह बताई?
📌 सुसाइड नोट और वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने वेतन और बाकी बकाया राशि देने के लिए उनसे ₹16 लाख रुपये की मांग की थी — जिसे देने के बाद भी उन्हें परेशान किया गया और अपमानित किया गया। खर्च जुटाने के लिए उन्होंने पत्नी के गहने गिरवी रखे और कर्ज लिया था।
📌 उन्होंने कहा था, “मैं जीना चाहता हूँ लेकिन बेबस हूँ…” — जिस शब्दों में उन्होंने मानसिक पीड़ा और अवसाद का जिक्र किया।
⚖️ FIR और प्रशासनिक कार्रवाई
🔹 घटना के बाद Gulariha Police Station में शिक्षक की पत्नी की तहरीर पर FIR दर्ज की गई है, जिसमें आरोप है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी और बाबू ने उन्हें प्रताड़ित और उकसाया।
🔹 FIR में BSA (Basic Shiksha Adhikari) शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और अन्य के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है।
🔹 जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है — जिसमें मुख्य विकास अधिकारी (CDO), उपजिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक शामिल हैं — ताकि मामले की विस्तृत जांच की जा सके।
🔹 इस बीच आरोपी लिपिक संजीव सिंह को निलंबित कर दिया गया है, ताकि निष्पक्ष जांच में बाधा न आए।
🧑🏫 मामला क्यों गंभीर है?
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शिक्षक ने भ्रष्टाचार, अपमान और मानसिक प्रताड़ना को आत्महत्या का कारण बताया है।
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उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए जीने की इच्छा जताई, लेकिन आर्थिक और मानसिक दबाव में यह कदम उठाया।
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प्रशासन ने तुरंत एफआईआर, जांच समिति और निलंबन जैसी कार्रवाई कर दी है — लेकिन मामला अब भी जांच के अधीन है।
📍 आगे क्या होने वाला है?
इस मामले की फोरेंसिक जांच (जैसे वीडियो और सुसाइड नोट का विश्लेषण) हो रही है, और जांच समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अगर जांच में अधिकारी की कोई लापरवाही या अन्य गड़बड़ी पाई जाती है, तो कठोर वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।