हाल ही में कई सरकारी शिक्षक संगठनों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (जैसे X/ट्विटर) पर सक्रिय अभियान चलाया है ताकि टीईटी (Teacher Eligibility Test) को बिना पूर्व नियुक्ति शिक्षकों पर लागू करने वाले नियम को हटाया जाए। यह अभियान #JusticeForTeachers जैसे हैशटैग के तहत जोर पकड़ रहा है।
📌 आंदोलन की प्रमुख बातें
🧑🏫 टीईटी की अनिवार्यता के ख़िलाफ़ संदेश फैलाना
शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में पोस्ट और हैशटैग अभियान चलाया, जिससे यह मुद्दा “टॉप ट्रेंड” में भी शामिल हुआ।
📆 शिक्षक संगठनों की अगली योजना
🔹 शिक्षकों ने काली पट्टी पहनकर विरोध जताने,
🔹 26 फरवरी को जिला स्तरीय धरना और ज्ञापन देने,
🔹 यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो नई दिल्ली के लिए मार्च / पैदल मार्च जैसी ठोस योजनाएँ भी घोषित की हैं।
📊 शिक्षकों की मुख्य मांग क्या है?
✔ 2011 से पहले नियुक्त उन शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त किया जाए।
✔ अनुभवी और सेवाधारी शिक्षकों को नियम के दायरे से बाहर रखा जाए ताकि उनकी नौकरी सुरक्षित रहे।
✔ सरकार नियम में संशोधन या हटाने पर पुनर्विचार करे।
📌 विरोध के पीछे का मूल कारण
शिक्षक संघों का तर्क है कि टीईटी परीक्षा का अनिवार्य नियम उन शिक्षकों पर लागू होना जिन्हें नियुक्ति के समय यह नियम नहीं बताया गया था, अनुचित और अन्यायपूर्ण है। इसका असर लाखों स्कूल शिक्षकों के करियर और नौकरी की सुरक्षा पर पड़ेगा।
🧑💻 ऑनलाइन आंदोलन का प्रभाव
✔ हैशटैग अभियान “Justice for Teachers” सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जमकर शेयर किया जा रहा है।
✔ आंदोलन ने शिक्षकों को एकजुट किया है और टीईटी के खिलाफ व्यापक समर्थन हासिल किया है।
✔ शिक्षक अब डिजिटल रणनीतियों के साथ बड़े भूगोल में अपनी आवाज़ बढ़ा रहे हैं।
📍 आगे क्या होने वाला है?
शिक्षक संगठनों ने यह निर्णय लिया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो वे समाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर अपने आंदोलन को और आगे बढ़ाएंगे, जिसमें बड़े पैमाने पर मार्च और ज्ञापन सौंपने की रणनीतियाँ शामिल होंगी।