सख्ती पीएफ न जमा करने वाली कंपनियों की निगरानी, कर्मचारियों को ऐसे फायदा

 ● कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत अधिक सुरक्षित होगी।

● पीएफ जमा न करने वाले संस्थानों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

●रोजगार योजनाओं का लाभ वास्तविक कर्मचारियों तक पहुंचेगा।

●फर्जी पंजीकरण और गलत दावों पर रोक लगेगी।

●कर्मचारियों को अपने खाते की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखेगी।



नई दिल्ली, एजेंसी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपनी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के डाटा को आपस में जोड़ने जा रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की भविष्य निधि (पीएफ) राशि सही समय पर और सही रकम में जमा करें। इस पहल का सीधा उद्देश्य रोजगार से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन है।

दरअसल, अभी तक कई बार ऐसा होता है कि कुछ संस्थान कर्मचारियों के वेतन से पीएफ काट लेते थे, लेकिन उसे समय पर जमा नहीं करते थे या पूरी जानकारी नहीं देते थे। अब ईपीएफओ अपना डाटाबेस सरकारी खरीद पोर्टल (जेम), जीएसटी विभाग और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ जोड़ रहा है। जेम वह मंच है, जहां केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग तथा सार्वजनिक उपक्रम सामान और सेवाएं खरीदते हैं। जेम पर पंजीकृत सेवा प्रदाताओं को अपने कर्मचारियों के पीएफ अंशदान का नियमित भुगतान करना होता है। नई व्यवस्था में यह आसानी से पता चल सकेगा कि कौन-कौन से प्रतिष्ठान पंजीकृत हैं और कंपनियां कर्मचारियों का पीएफ समय पर जमा कर रही हैं या नहीं। इसका मासिक सत्यापन किया जाएगा।

यूपी समेत इन राज्यों में शुरुआत : ईपीएफओ का वेतन संबंधी डाटा पहले से ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों के साथ साझा किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के साथ यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि अन्य राज्यों के साथ बातचीत जारी है। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और कर्मचारी राज्य बीमा निगम के साथ भी डाटा का आदान-प्रदान किया जा रहा है। इससे संस्थानों की सही पहचान और कर्मचारियों के पंजीकरण की जांच आसान होगी।

 रोजगार से जुड़ी योजनाओं में मददगार

जीएसटी विभाग से भी प्रतिष्ठानों के पंजीकरण संबंधी डाटा साझा करने पर सहमति बन चुकी है। इससे यह जांच आसान होगी कि किसी कंपनी का कारोबार और कर्मचारियों की संख्या क्या है और क्या उसके सभी कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में लाया गया है। यह कदम प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के प्रभावी संचालन में मददगार माना जा रहा है, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। लाभ लेने के लिए संस्थानों को जीएसटी पंजीकरण नंबर देना अनिवार्य है।