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आर्थिक तंगी से जूझ रहे गैर जनपद से आए शिक्षक, अनदेखी तीन माह से नहीं मिल रहा वेतन, परिवार संग भटकना मजबूरी

जौनपुर: जिम्मेदारों की लापरवाही कहें या व्यवस्था में खामी। गैर जनपद से आए 875 शिक्षक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्हें विद्यालय एलाट न होने के कारण जहां तीन माह से वेतन नहीं मिल रहा है, वहीं ऊहापोह के
चलते यह तय नहीं कर पा रहे कि कहां स्थाई निवास बनाएं।
उनकी इस दशा के चलते हजारों छात्रों की पढ़ाई चौपट हो रही है।
प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। चहुंओर अनियमितता और लूट-खसोट मची है।
शिक्षण सत्र शुरू हुए छह माह बीत गए। विभाग द्वारा 15 अक्टूबर से अ‌र्द्धवार्षिक परीक्षा की तिथि भी घोषित कर दी गई है। अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में जहां शिक्षकों की कमी है वहीं जूनियर हाईस्कूल में गणित, विज्ञान के शिक्षक न होने से पढ़ाई बाधित है।
व्यवस्था में खामी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शासन द्वारा गत 29-30 अगस्त को गैर जनपद से लगभग 875 शिक्षकों का स्थानांतरण जिले में किया गया है, लेकिन आज तक उन्हें विद्यालय आवंटित नहीं किया गया। वह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर कुछ देर इंतजार के बाद वापस लौट जा रहे हैं।
इतना ही नहीं तीन माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है। आर्थिक तंगी से जूझने के साथ ही कहां आवास बनाएं और अपने बच्चों का प्रवेश कहां कराएं यह तय नहीं कर पा रहे। एक माह पूर्व विभाग द्वारा विद्यालय एलाट करने के लिए विकल्प भरवाया गया, लेकिन आज तक आवंटित नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया की अपने तरीके से जांच करा ली गई है, लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं हो पा रहा है। बताते हैं कि यहां तैनात रहे बीएसए को कार्यमुक्त कर दिया गया लेकिन शासन से जिन्हें नियुक्त किया गया है वह आना नहीं चाहते। ऐसे में सारी प्रक्रिया लटक गई है।
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