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कौन होगा प्रदेश का महाधिवक्ता, बड़ी संख्या में बदले जाएंगे सरकारी वकील

इलाहाबाद : प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद विधि क्षेत्र की निगाहें महाधिवक्ता पद की ओर लग गई हैं। इस पद पर अब तक रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने इस्तीफा दे दिया है और एक हफ्ते के भीतर ही नया महाधिवक्ता चुने जाने के आसार हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए सरकार के प्रभावी नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। महाधिवक्ता नियुक्त होने के बाद ही सरकारी वकीलों में भी बड़ी संख्या में बदलाव होना तय है। लखनऊ बेंच में साढ़े चार सौ तो इलाहाबाद में लगभग साढ़े छ: सौ सरकारी वकील हैं। सरकार अपने हिसाब से उनकी संख्या तय करती है। इलाहाबाद में कितने अपर महाधिवक्ता रखे जाएंगें और लखनऊ में कितने यह सरकार की जरूरत पर निर्भर करेगा। सपा सरकार ने इलाहाबाद में पांच और लखनऊ में दो अपर महाधिवक्ता नियुक्ति किए थे लेकिन भाजपा सरकार इस संख्या में बढ़ोतरी कर सकती है। फिलहाल महाधिवक्ता पद के लिए जो नाम उभरकर सामने आए हैं, उनमें इलाहाबाद के राधाकांत ओझा और लखनऊ के एलपी मिश्र प्रमुख हैं। दोनों ही वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और बार एसोसिएशन का नेतृत्व कर चुके हैं। दोनों का संघ से जुड़ाव भी रहा है। राधाकांत शहर उत्तरी से टिकट के प्रबल दावेदार भी थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। इसी क्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है, जो पूर्व सांसद रह चुके हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता महेश चंद्र चतुर्वेदी के साथ ही रमेश सिंह व शशि प्रकाश के नाम की भी चर्चा है।

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