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डिप्टी सीएम का आदेश भी ताक पर, शिक्षामित्रों को नहीं दी जा रही मूल विद्यालयों में तैनाती

सुप्रीम कोर्ट से समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों की तैनाती मूल विद्यालयों में नहीं की जा रही है। प्रदेश में ऐसे प्रकरणों की संख्या हजारों में बताई जा रही है।
जिलों में बीएसए शिक्षामित्रों की तैनाती में इस कदर मनमानी कर रहे हैं कि उन पर डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के कड़ी कार्रवाई की चेतावनी का भी कोई खौफ नहीं है।
शासन ने समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों को यह सुविधा दी है कि वे या तो वर्तमान विद्यालय में रहें या अपने मूल विद्यालय में वापस चले जाएं। महिला शिक्षामित्रों को ससुराल वाले गांव में भी तैनाती की सुविधा दी गई है। इस बारे में जारी शासनादेश के मुताबिक पूरे प्रदेश में यह कार्यवाही 5 अगस्त तक पूरी हो जानी चाहिए थी। लेकिन इस पर कहीं अमल नहीं हो रहा है।

बाराबंकी में भी करीब 188 शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालयों में नहीं भेजा गया है। कमोवेश यह स्थित सभी जिलों की है। कई जिलों में बीएसए पर मूल विद्यालयों में तैनाती के एवज में सुविधा शुल्क मांगने के भी आरोप हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें दस हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। लेकिन उनकी तैनाती घर से 50-80 किमी दूर है। नतीजतन उनके मानदेय का ज्यादातर हिस्सा आने-जाने में ही खर्च हो जाता है।

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