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समायोजन 3.0: आज की सुनवाई का सार...

 *समायोजन 3.0*

*आज की सुनवाई का सार...*


आज देवरिया जिले की याचिका Writ A 124/2026 की सुनवाई कोर्ट नम्बर 18 में जस्टिस श्री प्रकाश सिंह जी की बेंच में हुई। यह मामला 29 नम्बर पर लगा हुआ था। मामला शुरू होते ही सरकारी वकील ने याचिका पर ऑब्जेक्शन किया कि 85 लोग पूरे प्रोसेस को नही रोक सकते और इनका न्याय क्षेत्र यह नही है... इस पर जज साहब ने कहा कि यदि प्रोसेस गलत है तो पूरे प्रोसेस को चैलेंज किया जा सकता है। 


इसके बाद हमारे सीनियर अधिवक्ता श्री HGS परिहार साहब ने 1981 सेवा नियमावली पर और रूल 21 पर बहस की और कोर्ट को सहमत कराने में सफल रहे कि बिना पालिसी बदले शिक्षकों का जबरन समायोजन नही कर सकते हैं। इसके बाद 2018 के रीना सिंह केस और 2024 के पुष्कर सिंह चंदेल की याचिका का जिक्र करते हुए उन्होंने सभी तथ्यों को रखा। इसी सत्र में 2 बार हुए स्वैच्छिक समायोजन के पश्चात इसी सत्र में समायोजित हुए शिक्षकों को दुबारा समायोजन करना गलत है। 2024 का शासनादेश जो रद्द हुआ था उस पर भी बहस हुई। इसके बाद यू डायस पर छात्र संख्या और RTE के बिंदुओं को रखा, जिसमें यह चर्चा हुई कि यदि कनिष्ठ का समायोजन किया जाएगा तो वो सदैव कनिष्ठ ही रहेगा और सदैव एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय समायोजित होता रहेगा। जज साहब ने सभी मुद्दों को बड़ी गंभीरता से सुना और सरकारी वकील को फटकार भी लगाई कि आप लोग पालिसी सही नही बनाते हैं। 


सरकारी वकील सिर्फ यही बहाना बनाते रहे कि साहब last in first out को कर रहे हैं या first in first out को करे तो भी समस्या आ रही है, हमारे विद्यालय बंद और एकल है, इस कारण करना पड़ रहा है। इस प्रकार लगभग 45 मिनट की बहस के बाद जज साहब ने मंगलवार को पुनः मामला लगाया है और दोनों पार्टियों से चार्ट तैयार कर के लाने को कहा है। हमारे अधिवक्ताओं द्वारा स्टेटस को करने का निवेदन किया गया है, जिस पर जज साहब ने कहा है कि इनकी भी मेरिट सुन के डिसाइड करेंगे। इस मामलें में परिहार साहब को अधिवक्ता अभिषेक सिंह और कीर्तिवीर सिंह द्वारा असिस्ट किया गया।


अब सभी जिले के लोगों से अपील है कि आप सभी हर जिले की याचिका लेकर आएं, जिससे कि कोर्ट को बताया जा सके कि पूरे प्रदेश में इस प्रकार की मनमानी नियमावली के विरुद्ध जा कर की जा रही है।

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