1999-2000 मे शिक्षा मित्र योजना उत्तर प्रदेश(उत्तराखंड) के साथ-साथ अन्य 5 राज्यों मे विभिन्न नामों से चलायी गयी ।
गुजरात : विद्या सहायक
आंध्रा प्रदेश : अंडरिकी विद्या (Vidya Volunteer Scheme)
महाराष्ट्र : शिक्षण सेवक
राजस्थान : शिक्षा कर्मी प्रोजेक्ट
हिमांचल प्रदेश : विद्या सहायक
कुछ राज्यों मे शिक्षामित्रों का चयन "जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी" द्वारा किया गया । कुछ राज्यों मे ब्लॉक पंचायत अथवा जिला पंचायत द्वारा किया गया । उत्तर प्रदेश मे शिक्षा मित्र पद पर चयन "ग्राम शिक्षा समिति " द्वारा किया गया । सभी राज्यों के शिक्षा मित्रों को संविदा पर ही रखा गया था किन्तु राज्यवार संविदा की शर्ते अलग-अलग थीं । इन अलग अलग शर्तों के कारण की हर जगह का मामला एक जैसा नही है । उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों से यह साफ तौर पर लिखवा लिया गया था की वे सरकारी नौकरी की मांग नही करेंगे जबकि कुछ राज्यों के शिक्षा मित्रों को बताया गया था की अगले कुछ वर्षों मे उनका समायोजन किया जाएगा ।
2010 मे आरटीई एक्ट लागू होने के बाद सभी राज्य एक ही काउंसिल के अधीन हो गए और टी ई टी पास करना तथा प्रशिक्षित होना अनिवार्य हो गया । जो लोग इन अर्हताओं को पूरा नही करते उन्हे किसी भी हाल मे शिक्षक नही बनाया जा सकता है ।

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कुछ राज्यों मे शिक्षामित्रों का चयन "जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी" द्वारा किया गया । कुछ राज्यों मे ब्लॉक पंचायत अथवा जिला पंचायत द्वारा किया गया । उत्तर प्रदेश मे शिक्षा मित्र पद पर चयन "ग्राम शिक्षा समिति " द्वारा किया गया । सभी राज्यों के शिक्षा मित्रों को संविदा पर ही रखा गया था किन्तु राज्यवार संविदा की शर्ते अलग-अलग थीं । इन अलग अलग शर्तों के कारण की हर जगह का मामला एक जैसा नही है । उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों से यह साफ तौर पर लिखवा लिया गया था की वे सरकारी नौकरी की मांग नही करेंगे जबकि कुछ राज्यों के शिक्षा मित्रों को बताया गया था की अगले कुछ वर्षों मे उनका समायोजन किया जाएगा ।
2010 मे आरटीई एक्ट लागू होने के बाद सभी राज्य एक ही काउंसिल के अधीन हो गए और टी ई टी पास करना तथा प्रशिक्षित होना अनिवार्य हो गया । जो लोग इन अर्हताओं को पूरा नही करते उन्हे किसी भी हाल मे शिक्षक नही बनाया जा सकता है ।

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