Advertisement

Govt Jobs : Opening

जो याची की नौकरी कर रहे हो वो धरने से ही तुमको मिली

21 तारिख को लखनऊ में हुए आंदोलन के बाद आज हुई वार्ता से घर बैठकर जो सबसे ज्यादा उम्मीद लगाए हुए थे आज वही लम्बा-लम्बा लिख रहे है। कोई कुछ कमी गिना रहा है कोई कुछ आरोप लगा रहा है।
ये सब लेखिनी के वो वीर है जिन्होंने कभी मरा हुआ चूहा ना मारा हो और छछूंदर की आवाज़ मात्र से बिस्तर पर चढ़ जाते हों। वो आज उन लोगों पर प्रश्न चिंन्ह लगा रहे है जो सीना तानकर उस पुलिस के सामने खड़े थे जिनकी लाठी ने कल ही एक हत्या की थी। ये वो लोग है जिन्होंने ना एफ आई आर की चिंता की ना, अपने भविष्य की, ना शर्दी की, ना लाठी-डंडे गोली की। आज जितने लोग घर बैठकर आंदोलन-वार्ता की समीक्षा कर रहे है, मयंक तिवारी प्रवीण श्रीवास्तव शिव कुमार पाठक अजय ठाकुर कमलकांत मान बहादुर टीटू भदौरिया शिवेश मिश्रा राम कुमार पटेल रविंद्र दादरी आदि द्वारा किये गए इस बहादुरी के काम पर ऊँगली उठा रहे है वो बताएं क्या उनके घर बैठने से हमें नोकरी मिल गयी..???? जिसको तुम नेतागिरी बोलते हो ना इसी नेतागिरी से ही हम दो सो साल की गुलामी से आज़ाद हुए थे।
आज एक चाणक्य के वंशज ने यहाँ तक लिख दिया कि धरने आंदोलन से मिला क्या है तो आप महाशय सुन लो तुम जो याची की नौकरी कर रहे हो वो धरने से ही तुमको मिली, तुम्हारी परीक्षा भी धरने से हुई और तुम जो घर में बैठे हो वहां SCERT जाकर देखो दो महीने से लड़के लगे हुए है मौलिक के लिए और वो करा भी देंगे और तुम खुद कर जाकर ले भी लोगो लेकिन बोलोगे यही कि धरने से मिला क्या है...????
दोस्तों आज मेरी इस पोस्ट को हर उस आदमी के मुहँ पर तमाचे की तरह जाकर मारना जो उन लोगों पर सवाल हुआ था है जो लखनऊ पुलिस के सामने चलती विधान सभा में हमारी नोकरी के लिए सीमा ताने खड़े थे। अगर ये सहयोग नही कर सकते, घर से निकल नही सकते, तो इनको बोलने का भी कोई अधिकार नही है।धन्यबाद
sponsored links:
ख़बरें अब तक - 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती - Today's Headlines

ليست هناك تعليقات:

إرسال تعليق

UPTET news