फ़ैजाबाद । साल 2017 के विधानसभा चुनाव की तारीख मुकर्रर हो चुकी है नेता जी भी अपने विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की गणेश परिक्रमा शुरू कर चुके हैं उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में हर जिले में अपनी जरूरतें हैं जनता की अपनी आशाएं हैं |
अब मंदिर मस्जिद का राग छोडिये हुजुर भूखे पेट तो भजन भी नही होता
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक रही है | सदियों से इस पौराणिक शहर में रहने वाले लोग एक दूसरे से मिल कर अमन चैन से रहते आए हैं | सन 1992 में हुई विध्वंस की घटना के बाद भी इस शहर में अमन और चैन कायम रहा और उस घटना के करीब 24 साल बीत जाने के बाद अब अयोध्या में रहने वाले हिंदू और मुस्लिम कौम के लोग उस घटना को याद नहीं करना चाहते | दोनों ही धर्म के लोगों के मन में अपने धर्म के प्रति पूरी आस्था और श्रद्धा है हर कोई इस विवाद का हल चाहता है लेकिन इस विवाद के हल के बदले अयोध्या का कोई नागरिक यह नहीं चाहता कि उसके बच्चे भूखे रहें और उन्हें रोटी नसीब न हो | लेकिन गाहे-बगाहे मंदिर मस्जिद की ढपली बजा कर अयोध्या के अमन-चैन में सियासी खलल डाला जाता रहा है जिसका खामियाजा हमेशा अयोध्या के रहने वाले हर उस बाशिंदे ने उठाया है जो दिन भर कमाता है और रात में खाता है | इस बार भी विधानसभा चुनाव में विभिन्न दलों के नेता अपने अपने चुनावी मेनिफेस्टो को लेकर जनता के बीच आए हैं लेकिन आम जनता की राय क्या है यह खुद जनता बता रही है ।
अयोध्या को रोजगार चाहिए कारोबार चाहिए
विवादित स्थल पर मंदिर मस्जिद का विवाद नया नहीं है इस मुकदमे को 50 साल बीत चुके हैं अयोध्या के लोग भी यह मानते हैं कि इस विवाद का हल न्यायालय के भरोसे छोड़ दिया जाना चाहिए मंदिर मस्जिद को कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए |अयोध्या में रहने वाले पेशे से शिक्षक राघवेंद्र अवस्थी का कहना है कि यह शहर मंदिर मस्जिद की राजनीति के नाम पर तो पूरी दुनिया में जाना जाता है लेकिन आलम यह है कि आज का युवा अयोध्या को छोड़कर दूसरे शहरों में जाकर रोजगार तलाश रहा है | जिसकी वजह यह है कि अयोध्या फैजाबाद में बड़े उद्योग कारखाने नहीं है व्यापार और नौकरी के साधन नहीं है अयोध्या के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा यहां के लोगों के लिए रोजगार और रोटी होना चाहिए ।
अगर राम के नाम पर ही करनी है राजनीति तो कम से कम राम के नाम पर तो बदलो अयोध्या की सूरत
अयोध्या में रहने वाले शिक्षक डॉ जनार्दन उपाध्याय का कहना है कि भगवान श्री राम अयोध्या ही नहीं दुनिया भर में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक हैं हमारी सनातनी परंपरा के वाहक हैं | उनके प्रति सभी के हृदय में श्रद्धा है लेकिन उनकी नगरी अयोध्या उन्हीं के नाम पर राजनीति का केंद्र बन कर रह गई है । धंधा कारोबार तो यहां कुछ है नहीं राम के नाम पर सिर्फ मेले होते हैं उन मेलों में भी अच्छी व्यवस्था श्रद्धालुओं को नहीं मिलती | यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के आने जाने के लिए परिवहन की बेहतर व्यवस्थाएं उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था उनके ठहरने का पूरा इंतजाम अगर हो तो बनारस और इलाहाबाद आगरा की तरह धार्मिक नगरी अयोध्या भी एक पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो सकती है | लेकिन न जाने किस श्राप से ग्रसित है रामनगरी अयोध्या जो सिर्फ सियासत का केंद्र है ।
चुनावी मेनिफेस्टो में अयोध्या को मिले रोजगार तो बने बात
पेशे से शिक्षक सत्येन्द्र गुप्ता का कहना है कि आखिरकार चुनाव में नेताओं के लिए अयोध्या के लिए बड़े कारोबार उद्योग धंधे और बेरोजगारी मुद्दा क्यों नहीं बन पा रहे | सिर्फ सड़के और नालियां बनवाकर ही जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं | जब तक देश में रहने वाले नागरिकों का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास संभव नहीं है इसलिए आम जनमानस के विकास के लिए उसके लिए बिजली पानी के साथ रोजगार भी जरूरी है जनप्रतिनिधि अपने चुनावी मुद्दे में कम-से-कम अयोध्या विधानसभा से रोजगार को मुद्दा बनाएं । पेशे से शिक्षक नर्मदेश्वर पांडे का कहना है कि अयोध्या विधानसभा में राजनीती करने वाले नेताओं में चाहे वो किसी भी दल से जुड़े हों सभी भावनाओं से ऊपर उठकर सबसे पहले गरीब के पेट भरने की व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए बाकि जो सक्षम हैं वो अपने लिए बिजली पानी और सफाई की व्यवस्था स्वयम कर ले रहे हैं मुद्दा सिर्फ गरीबों के पेट से जुड़ा होना चाहिए |
ख़बरें अब तक - 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती - Today's Headlines
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- साल 2017 में 120 छुट्टियां, 12 लंबे विकेंड्स होगे
- उम्मीद कम ही है की 22 फ़रवरी को भी कोर्ट कोई स्पष्ट आदेश देगी या सरकारी तंत्र उस ऑर्डर का पालन करेगी
अब मंदिर मस्जिद का राग छोडिये हुजुर भूखे पेट तो भजन भी नही होता
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक रही है | सदियों से इस पौराणिक शहर में रहने वाले लोग एक दूसरे से मिल कर अमन चैन से रहते आए हैं | सन 1992 में हुई विध्वंस की घटना के बाद भी इस शहर में अमन और चैन कायम रहा और उस घटना के करीब 24 साल बीत जाने के बाद अब अयोध्या में रहने वाले हिंदू और मुस्लिम कौम के लोग उस घटना को याद नहीं करना चाहते | दोनों ही धर्म के लोगों के मन में अपने धर्म के प्रति पूरी आस्था और श्रद्धा है हर कोई इस विवाद का हल चाहता है लेकिन इस विवाद के हल के बदले अयोध्या का कोई नागरिक यह नहीं चाहता कि उसके बच्चे भूखे रहें और उन्हें रोटी नसीब न हो | लेकिन गाहे-बगाहे मंदिर मस्जिद की ढपली बजा कर अयोध्या के अमन-चैन में सियासी खलल डाला जाता रहा है जिसका खामियाजा हमेशा अयोध्या के रहने वाले हर उस बाशिंदे ने उठाया है जो दिन भर कमाता है और रात में खाता है | इस बार भी विधानसभा चुनाव में विभिन्न दलों के नेता अपने अपने चुनावी मेनिफेस्टो को लेकर जनता के बीच आए हैं लेकिन आम जनता की राय क्या है यह खुद जनता बता रही है ।
अयोध्या को रोजगार चाहिए कारोबार चाहिए
विवादित स्थल पर मंदिर मस्जिद का विवाद नया नहीं है इस मुकदमे को 50 साल बीत चुके हैं अयोध्या के लोग भी यह मानते हैं कि इस विवाद का हल न्यायालय के भरोसे छोड़ दिया जाना चाहिए मंदिर मस्जिद को कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए |अयोध्या में रहने वाले पेशे से शिक्षक राघवेंद्र अवस्थी का कहना है कि यह शहर मंदिर मस्जिद की राजनीति के नाम पर तो पूरी दुनिया में जाना जाता है लेकिन आलम यह है कि आज का युवा अयोध्या को छोड़कर दूसरे शहरों में जाकर रोजगार तलाश रहा है | जिसकी वजह यह है कि अयोध्या फैजाबाद में बड़े उद्योग कारखाने नहीं है व्यापार और नौकरी के साधन नहीं है अयोध्या के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा यहां के लोगों के लिए रोजगार और रोटी होना चाहिए ।
अगर राम के नाम पर ही करनी है राजनीति तो कम से कम राम के नाम पर तो बदलो अयोध्या की सूरत
अयोध्या में रहने वाले शिक्षक डॉ जनार्दन उपाध्याय का कहना है कि भगवान श्री राम अयोध्या ही नहीं दुनिया भर में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक हैं हमारी सनातनी परंपरा के वाहक हैं | उनके प्रति सभी के हृदय में श्रद्धा है लेकिन उनकी नगरी अयोध्या उन्हीं के नाम पर राजनीति का केंद्र बन कर रह गई है । धंधा कारोबार तो यहां कुछ है नहीं राम के नाम पर सिर्फ मेले होते हैं उन मेलों में भी अच्छी व्यवस्था श्रद्धालुओं को नहीं मिलती | यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के आने जाने के लिए परिवहन की बेहतर व्यवस्थाएं उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था उनके ठहरने का पूरा इंतजाम अगर हो तो बनारस और इलाहाबाद आगरा की तरह धार्मिक नगरी अयोध्या भी एक पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो सकती है | लेकिन न जाने किस श्राप से ग्रसित है रामनगरी अयोध्या जो सिर्फ सियासत का केंद्र है ।
चुनावी मेनिफेस्टो में अयोध्या को मिले रोजगार तो बने बात
पेशे से शिक्षक सत्येन्द्र गुप्ता का कहना है कि आखिरकार चुनाव में नेताओं के लिए अयोध्या के लिए बड़े कारोबार उद्योग धंधे और बेरोजगारी मुद्दा क्यों नहीं बन पा रहे | सिर्फ सड़के और नालियां बनवाकर ही जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं | जब तक देश में रहने वाले नागरिकों का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास संभव नहीं है इसलिए आम जनमानस के विकास के लिए उसके लिए बिजली पानी के साथ रोजगार भी जरूरी है जनप्रतिनिधि अपने चुनावी मुद्दे में कम-से-कम अयोध्या विधानसभा से रोजगार को मुद्दा बनाएं । पेशे से शिक्षक नर्मदेश्वर पांडे का कहना है कि अयोध्या विधानसभा में राजनीती करने वाले नेताओं में चाहे वो किसी भी दल से जुड़े हों सभी भावनाओं से ऊपर उठकर सबसे पहले गरीब के पेट भरने की व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए बाकि जो सक्षम हैं वो अपने लिए बिजली पानी और सफाई की व्यवस्था स्वयम कर ले रहे हैं मुद्दा सिर्फ गरीबों के पेट से जुड़ा होना चाहिए |
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