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68500 शिक्षक भर्ती में मामले में मुख्यमंत्री की बड़ी कार्यवाही ,परीक्षा नियामक प्राधिकारी सुत्ता सिंह निलंबित

इलाहाबाद:योगी सरकार में हुई शिक्षक भर्ती परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद हडकंप मच गया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 68500 सहायक भर्ती के परिणाम में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद बड़ी कार्यवाही करते हुए परीक्षा नियामक अधिकारी सुत्ता सिंह को निलंबित कर दिया है।
जिसके बाद पुरे महकमे में हडकम्प मच गया है।वही उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा और रजिस्ट्रार जितेंद्र सिंह को भी उनके पद से हटा दिया गया हैं।
बता दें कि शिक्षक भर्ती 2018 के लिए 27 मई को प्रदेश भर में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।और इसका परिणाम 13 अगस्त को घोषित हुआ था।सहायक शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा के परिणाम में 41,556 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था।लेकिन परिणाम निकलने के बड़ा से ही भर्ती पर सवाल उठने लगे थे।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा जानकारी के अनुसार पहले हाईकोर्ट में एक अभ्यर्थी की कॉपी बदलने का मामला सामने आया। वही फिर आरक्षण के नियमों की अनदेखी करते हुए परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में से लगभग 6000 अभ्यर्थियों को बाहर करने का विवाद शुरू हो गया। इन अभ्यर्थियों के लगातार संघर्ष प्रदर्शन के बाद इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया।
68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को बीते दिनों मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र बांटे गये।वही सीएम योगी के नियुक्ति पत्र बांटने के बाद तब हंगामा हो गया जब 23 ऐसे अभ्यर्थियों का नाम सामने आया। जो लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण ही नहीं हुए थे। शिकायत के बाद ऐसे अभ्यर्थियों का नियुक्ति पत्र रोकने का आदेश दिया गया। उसके बाद से ही भर्ती प्रक्रिया में धांधली और बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई जाने लगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों को तलब करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही का निर्देश दिया और परीक्षा नियामक अधिकारी सत्ता सिंह को निलंबित कर दिया।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी के खिलाफ तब और बड़ा मामला सामने आया ऐसे लोग सामने आये जो परीक्षा में फेल थे और उन्हें नियुक्ति पत्र दे दिया गया। जिसकी सूचना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया इसके बाद विभागीय तौर उन अभ्यर्थियों का नियुक्ति पत्र रोकने का आदेश जारी किया गया

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