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प्रतियोगियों ने यूपीपीएससी की मांगी पुरानी व्यवस्था

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पारदर्शी, निष्पक्ष व त्वरित कार्यप्रणाली पर जोर दिया जा रहा है। इसका सार्थक परिणाम भी दिखने लगा है। वर्षों से लंबित भर्तियां निस्तारित हो रही हैं। वहीं, नई भर्तियों का परिणाम तीन से चार महीने में आने लगा है, लेकिन प्रतियोगी इतने से संतुष्ट नहीं हैं। वो आयोग में पुरानी

व्यवस्था चाहते हैं। पीसीएस परीक्षा से हटाए गए विषयों को शामिल कराने, स्केलिंग-माडरेशन की स्थिति स्पष्ट करने, कापियों के मूल्यांकन संबंधित विषय विशेषज्ञों से कराने की मांग उठाई है। इसके मद्देनजर रविवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर ‘प्रतियोगी छात्र पंचायत’ हुई। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष कौशल सिंह ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि पारदर्शिता के नाम पर आयोग प्रतियोगियों के साथ अन्याय कर रहा है। हिंदी माध्यम के प्रतियोगी छात्रों को बाहर करने के लिए व्यवस्था में बदलाव हो रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। अजीत राय ने कहा कि नई व्यवस्था लागू करके आयोग प्रतियोगियों का विश्वास खो रहा है। अगर वास्तव में प्रतियोगियों का हित चाहते हैं तो सारी पुरानी व्यवस्था लागू की जाय। ओपी सिंह, जय द्विवेदी कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 28 जनवरी से प्रस्तावित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2021 को स्थगित करने की मांग उठाई। इस दौरान कुंवर साहब सिंह, प्रदीप सिंह, आलोक कुमार अखिलेश मिश्र, गौरव सिंह आदि मौजूद रहे।

ये हैं ‘प्रतियोगी छात्र पंचायत’ में पारित मुद्दे lपीसीएस मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय का विवाद लगातार बना है। इसमें स्केलिंग का मुद्दा प्रमुख है। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक विषय हटाकर उसे यूपी विशेष अथवा सामान्य अध्ययन काएक पेपर और बनाया जाय।

lहर भर्ती परीक्षा की संशोधित उत्तरकुंजी जारी की जाय।lपीसीएस के तहत जीआइसी प्रधानाचार्य, डायट प्रवक्ता व बीएसए पद की योग्यता समतुल्य रखी जाय। lपीसीएस-जे व अभियोजन अधिकारी की परीक्षा प्रतिवर्ष कराई जाय।lईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को आयुसीमा में न्यूनतम पांच वर्ष की छूट मिले। lहर भर्ती का अंतिम परिणाम आने के एक महीने के अंदर अंकपत्र जारी किया जाना चाहिए।

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