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UPTET केस आर्टिकल 142 : यही एक बात अचयनितों के जीवन को खुशगवार करने के लिए पर्याप्त

जीतेन्द्र सिंह/हिमांशु राणा आर्थिक मामलों में कभी भी विश्वशनीय नहीं थे जिसका प्रमाण वो समय-2 पर देते रहे हैं। जब जीतेन्द्र सिंह ने फर्जीवाड़ा पर लखनऊ बेंच में रिट की थी तब मैंने इनका आर्थिक सहयोग किया और
करवाया परंतु मेरे बार-2 सार्वजनिक तौर पर अपील करने के पश्चात भी ये महानुभाव लोग चंदे के पैसे का हिसाब देने की जहमत कभी नहीं उठाये। जानकार बड़ा दुःख होता है कि इनकी लूट खसोट अब तक जारी है बस तरीके अलहदा हो गए हैं शायद। टेटपास बीएड बेरोजगारों ने करोड़ों का चन्दा दिया सभी को परंतु मुझे हमेशा दुःख हुआ ये देखकर कि उसमें से 10-20% से अधिक का सदुपयोग कभी नही हो पाया। कलयुग है भाई का करें। अब तो लोगों को जहन्नुम का भी भय नहीं लगता। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। अगर अचयनितों को लाभ की स्थिति हासिल करनी है तो अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी होगी। चयनितों (72825/८41) के साथ संघर्ष से कुछ हासिल नहीं होना क्योंकि दोनों में conflicts ऑफ़ interests है। tet केस में इतना रायता फ़ैल चुका है कि इसका निर्धारण आर्टिकल 142 के उपयोग के बिना अब संभव नही रह गया है। और यही एक बात अचयनितों के जीवन को खुशगवार करने के लिए पर्याप्त है। बाकी आप सभी समझदार हैं ही।
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