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पीसीएस समेत सीधी भर्ती की लगभग दो सौ से अधिक परीक्षाएं भी सीबीआइ जांच के दायरे में: अनिल यादव के कार्यकाल में हुईं नियुक्तियां निशाने पर

लखनऊ  उप्र लोक सेवा आयोग में पिछले पांच साल में हुई भर्तियों की सीबीआइ जांच न सिर्फ कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा सकती है, बल्कि इसके दायरे में पिछली सरकार के कई प्रभावशाली नेता भी आएंगे।
नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के खुले आरोपों के बीच सपा शासन में न सिर्फ आयोग के अधिकारियों को संरक्षण मिला था बल्कि उनके पक्ष में सरकार लंबी अदालती लड़ाई तक लड़ चुकी है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने गत जुलाई में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में 2012 से 2015 के बीच की भर्तियों की जांच कराने का फैसला किया था। सीबीआइ ने सहमति दे दी है और जल्द ही इस बारे में मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। इसमें विवादास्पद रहे डॉ. अनिल यादव के कार्यकाल में की गईं नियुक्तियां शामिल होंगी । इसमें पीसीएस की पांच परीक्षाएं हैं। सीधी भर्ती की लगभग दो सौ से अधिक परीक्षाएं भी जांच के दायरे में होंगी। मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय के अनुसार जांच में यह बिंदु भी उभरेगा कि आखिर किन लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए आयोग में मनमाने फैसले लिए गए।

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