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फर्जी शिक्षकों पर प्रशासन की गाज गिरी

हरदोई. आये दिन विवादों में लिप्त रहने वाले शिक्षा विभाग की लचर कार्यशैली के चलते फजऱ्ीवाड़े का एक मामला सामने आया है। दरअसल मामला परिषदीय विद्यालयों में तैनात उन शिक्षकों और शिक्षिकाओं का है जो आज से लगभग 13 वर्षों से फज़ऱ्ी अंकपत्रों पर नौकरी कर रहे थे।
आगरा के डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय से बने थे। ये बीएड के फज़ऱ्ी अंकपत्र अभी तक 41 फज़ऱ्ी शिक्षकों के नाम सामने आये हैं और अन्य सात ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियो को शेष बची सूचना देने के लिए दो दिन की महोलत बीएसए हरदोई द्वारा दी गई है। फजऱ्ीवाड़े का ये मामला पहला नहीं है बल्कि इससे पहले भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जिसमें लगभग 66 बीटीसी के शिक्षक फज़ऱ्ी तरह से कार्यरत थे और उस मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है और अभी एक मामले की जांच पूरी नहीं हो पाई थी की तभी इस फजऱ्ीवाड़े का खेल सामने आ गया। जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2004-05 में प्राप्त हुई बीएड की डिग्रियों और अंकपत्रों की जांच के इस मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के दौरान अभी तक 12 ब्लॉकों से प्राप्त जानकारी में 41 नाम सामने आए है जिनको निष्कासित करने का नोटिस भी जारी हो चूका है।
दो दिन की महोलत दी गई है
मामला जिले के परिषदीय विद्यालयों में तैनात उन शिक्षकों का है जो पिछले 13 वर्षों से फज़ऱ्ी अंकपत्रों के जरिए कार्यरत थे। बेसिक शिक्षा परिषद के आदेशानुसार शिक्षक भर्ती की जांच कराई गई तो इस फज़ऱ्ीवाडे से पर्दा उठा. जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2004-05 में प्राप्त हुई बीएड की डिग्रियों और अंकपत्रों की जांच के इस मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के दौरान अभी तक 12 ब्लॉकों से प्राप्त जानकारी में 41 नाम सामने आए है जिनको निष्कासित करने का नोटिस भी जारी हो चूका है। शेष बचे सात ब्लॉकों सुरसा, मल्लावां, अहिरोरी, संडीला, भरावन और शहाबाद के खंड शिक्षा अधिकारियो को आगरा के विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त करे हुए शिक्षकों के अंकपत्रों व डिग्री की जांच कर सूचना प्राप्त कराने के लिए दो दिन की महोलत दी गई है।
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