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शिक्षामित्रों का मानदेय न देने पर बीएसए और लेखाधिकारी तलब, शिक्षा निदेशक बेसिक के तेवर हुए तल्ख

शासन से मिले मानदेय का भुगतान न कर बेसिक शिक्षा के जिम्मेदारों ने सैकड़ों शिक्षामित्रों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। शिक्षामित्र जुलाई से वेतन के इंतजार में बैठे थे। जिला मुख्यालय को करीब सवा दो करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। समय रहते आहरण न होने पर मिला बजट वापस हुआ है। भुगतान किए बगैर लौटे बजट पर शिक्षा निदेशक बेसिक ने बीएसए सहित वित्त एवं लेखाधिकारी को तलब किया है।


जिले में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा नियुक्त शिक्षामित्रों की संख्या 354 के करीब है। सपा सरकार में शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक में समायोजित होने में यह शिक्षामित्र भी शामिल थे। जुलाई 2017 में समायोजन रद होने के बाद 10 हजार रुपये मासिक मानदेय के साथ इनकी वापसी हुई, लेकिन जिले स्तर पर मानदेय के नाम पर मनमानी शुरू हो गई। बिल भुगतान में लेटलतीफी होने से शिक्षामित्रों का यह मानदेय जुलाई से कागजों में फंसा रहा। धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन जिला मुख्यालय स्तर पर दिए गए लेकिन मनमानी पर अड़े अधिकारियों का ढर्रा नहीं सुधरा। जिला प्रशासन के दखल देने के बाद बिल की फाइलों से धूल हटाकर वित्तीय वर्ष 2017-18 समाप्ति से कुछ दिन पूर्व मानदेय की मांग हुई। शासन से सवा दो करोड़ के करीब बजट आवंटित हुआ। यहां भी भुगतान के नाम पर लेटलतीफी कर दी गई। जिस कारण शिक्षामित्रों को उनका मेहनताना मिलते-मिलते छिन गया। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा निदेशक

(बेसिक) डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने बीएसए सहित वित्त एवं लेखाधिकारी को तलब किया ह । मानदेय भुगतान न होने पर नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा है कि शासन से मिली ग्रांट क्यों आहरित नहीं की गई।

वित्तीय वर्ष 2017-18 में शासन से मंजूर हुए थे 2.15 करोड़ शिक्षा निदेशक बेसिक के तेवर तल्ख,
स्पष्टीकरण मांगा गया प्रभारी बीएसए के कार्यकाल में आया था बजट127 जुलाई 2017 से बीएसए कुर्सी पर तैनात नसरीन फारूकी के समय मानदेय भुगतान की लड़ाई शिक्षामित्रों ने शुरू की थी। कई बार उन्हें ज्ञापन दिए गए। लेकिन, हर बार उन्हें टरकाने का कार्य हुआ। 9 अप्रैल 2018 के बाद वीके शर्मा को बीएसए का चार्ज मिलने के बाद वह अपने मूल पद खंड शिक्षाधिकारी बिछिया पर लौट हैं। 2.15 करोड़ का बजट मार्च 2018 में आवंटित हुआ था।शासन से मानदेय भुगतान का बजट 31 मार्च को करीब रात 9:34 बजे मिला था। ट्रेजरी से टोकन न मिलने से धनराशि आहरण नहीं हो सकी थी।

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