इलाहाबाद : पीसीएस की परीक्षाओं में स्केलिंग और मॉडरेशन के नाम पर
मनमानी उप्र लोक सेवा आयोग पर ही भारी पड़ने वाली है। आयोग के अधिकारियों
ने इन दोनों ही व्यवस्थाओं में नियमों से खिलवाड़ किया। पूर्व अध्यक्ष डा.
अनिल यादव के कार्यकाल में नियमों का जमकर उल्लंघन हुआ।
भर्तियों की सीबीआइ
जांच में अब तक यह बात साफ हो चुकी है। जांच अधिकारी किसी भी दिन आयोग के
पूर्व अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर सकते हैं। मॉडरेटर का नाम तो आयोग नहीं
बता सका जबकि सीबीआइ ने अब स्केलिंग पर भी जांच शुरू कर दी है। 1आयोग में
स्केलिंग व मॉडरेशन ही ऐसी व्यवस्था है जिससे अभ्यर्थी को प्राप्त अंकों का
निर्धारण होता है। मॉडरेशन में तो मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका की
जांच विशेषज्ञों के एक पैनल से करवाई जाती है, जिसमें किसी एक विशेषज्ञ को
उसका हेड बनाकर कापी जंचवाई जाती है फिर उसी कॉपी को मॉडल के रूप में पेश
कर अन्य कापियों का मूल्यांकन होता है। लेकिन, पीसीएस 2015 की उत्तर
पुस्तिकाओं में मॉडरेटर कौन था इस बारे में सीबीआइ टीम ने 28 मार्च को सवाल
किए तो आयोग में विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे रहे। वहीं से सीबीआइ ने
मॉडरेशन में गड़बड़ी पकड़ी, पड़ताल में पता चला कि मॉडरेटर कोई और नहीं
बल्कि पूर्व अध्यक्ष के इशारे पर नियुक्त आयोग के ही अधिकारी या कर्मचारी
थे। 1सीबीआइ के सूत्र बताते हैं कि स्केलिंग में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आ
गई है। आयोग में मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की कई दिन से हो रही
जांच में यह भी सामने आया है कि स्केलिंग के नाम पर मनमानी हुई। स्केलिंग
वैकल्पिक विषयों में नंबर की समानता के लिए करने की व्यवस्था है। आयोग ने
पूर्व में दावा किया था कि विशेषज्ञों की ओर से तैयार वैज्ञानिक फामरूले के
आधार पर स्केलिंग होती है लेकिन, वह फामरूला गोपनीय रखा गया है।
उच्चाधिकारियों के आने पर किसी भी दिन संबंधित अधिकारियों से पूछताछ होगी।
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