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टीचर्स अच्छे से पढ़ा रहे हैं या नहीं? यूपी सरकार इस तरह करेगी पता

लखनऊ, 15 अप्रैल 2018, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक नई कवायद शुरू की है. इस कवायद के मुताबिक विश्वविद्यालय के छात्रों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर तय किया जाएगा कि शिक्षक कक्षाओं में सही ढंग से पढ़ा रहे हैं या नहीं. जिससे कक्षाओं से गायब रहने वाले शिक्षकों पर नकेल कसने में कामयाबी मिलेगी.
विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए एक फीडबैक पोर्टल तैयार किया गया है. इसकी मदद से अलग-अलग पाठयक्रमों में पढ़ा रहे शिक्षकों का फीडबैक लिया जाएगा. इस पोर्टल पर एक फार्म होगा जिसमें कोर्स, वर्ष भरने के साथ ही शिक्षक का नाम भी भरना होगा. इसके बाद छात्र विभिन्न पैरामीटर पर उनकी रैंकिंग करेंगे.

अधिकारी के मुताबिक इस रैंकिंग के माध्यम से लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस पोर्टल के लागू होने से पहले ही शिक्षकों के भीतर खलबली मची गई है.

विश्वविद्यालय स्तर पर इस पोर्टल को तैयार करने की जिम्मेदारी आईटी विभाग के डीन प्रो. आर. ए. खान को मिली है. खान ने बताया कि पोर्टल लगभग पूरी तरह से तैयार हो गया है और जल्द ही इसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन कर दिया जाएगा. इसके बाद हर विभाग के विभागाध्यक्ष शिक्षकों की परफार्मेंस का रिव्यू विद्यार्थियों से मिले फीडबैक के आधार पर किया जाएगा. इसके बाद यह रिपोर्ट विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजी जाएगी.

पोर्टल की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रो. खान ने बताया कि विश्वविद्यालय की तरफ से इस फार्म में लगभग दो दर्जन बिंदु शामिल किए गए हैं. जैसे कि शिक्षक क्लास में कितना आते हैं, मोड ऑफ टीचिंग, उनका व्यवहार सहित कई बिंदु शामिल किए गए हैं. हर विकल्प के आगे एक्सीलेंट, वेरीगुड, गुड और खराब का विकल्प शामिल किया गया है.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. सी. सोबती ने स्वीकार किया है कि इस तरह की कवायद शुरू की गई है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे विभागीय स्तर पर काफी सुधार होने की उम्मीद है.

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक शिक्षकों का फीडबैक देने वाले विद्यार्थियों की पहचान गुप्त रखी जाएगी. फार्म भरने के बाद विद्यार्थी की व्यक्तिगत जानकारी को छुपा लिया जाएगा ताकि शिक्षकों को विद्यार्थियों के बारे में जानकारी न मिल सके. शिक्षक अगर चाहेगा भी तो वह यह पता नहीं कर पाएगा कि किस विद्यार्थी ने उसे क्या रैंकिंग दी है.

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