पूर्व में मेरा समायोजन नहीं हो सका था, केवल 3500 रुपये मानदेय में ही
अपना जिम्मेदारियां निभा रहा था। इसके बाद यह मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये
कर दिया गया, जो पहले से काफी अधिक है, लेकिन वर्तमान की जरूरतों के हिसाब
से कम ही है।
वर्तमान सरकार से उम्मीद थी कि अब यह सरकार हमारे लिए कुछ
करेगी। लेकिन अनुपम जायसवाल ने जो बयान दिए, उससे में बहुत आहत हुआ हूं।
यदि बेसिक शिक्षा मंत्री ने अपना बयान नहीं बदला और सदमे से कोई भी
शिक्षामित्र की मौत होती है तो इसके पीछे सरकार जिम्मेदार होगी।
- आशाराम अहिरवार
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय इमलिया कलां।
समायोजित
होने के बाद जीवन ने रफ्तार पकड़ ली थी, इससे परिवार में सब खुश थे।
लेकिन, सरकार न्यायोचित कदम न उठाए जाने के कारण जीवन से बहुत हताश हूं। कब
क्या घटना घटित हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि दो बार टीईटी पास
होने के बाद भी शासन से न्याय नहीं मिला।
- गोविंद विहारी दुबे
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय देवरी।
मेरा
विगत जुलाई माह से मानदेय नहीं मिला है और हर रोज अपने गांव से 50
किलोमीटर दूरी तय करके विद्यालय जाता हूं। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई
है कि मोटर साइकिल में भी पेट्रोल डलवाने के लिए दूसरों से कर्जा लेना
पड़ता है। पिछले दिनों में मैं काफी कर्जे में आ गया हूं, हमेशा ही मानसिक
तनाव बना रहता है। यदि मुझे कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार शासन होगा।
लालाराम रजक
परिषदीय शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय बलरगुवा।
अंतरराष्ट्रीय
महिला दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा मंत्री महिला होते हुए भी हम महिला
शिक्षामित्रों की अनदेखी कर रहे हैं। एक ओर जब भारत के प्रधानमंत्री,
मुख्यमंत्री महिला दिवस की बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारी उपेक्षा
की गई है। यदि सरकार हमारे हक में तुरंत निर्णय नहीं लेती तो प्रदेश की
महिला शिक्षामित्र प्रतिभाग करेगी।
अर्चना राजपूत
समायोजित शिक्षामित्र, जखौरा।
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