जागरण टीम, (बाराबंकी): राजधानी लखनऊ के समीपवर्ती जिले के बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में पठन-पाठन तो दूर यहां शिक्षक नियमित न होने से बच्चे भी पढ़ने के लिए कभी-कभी ही आते हैं।
कारण साफ है कि यह सीमावर्ती विद्यालयों में शिक्षकों की कमी नहीं है, लेकिन स्कूल खोलने से लेकर बंद करने का काम शिक्षामित्र ही करते हैं, क्योंकि कुर्सी रोड़ के विद्यालयों में रसूखदार परिवार के शिक्षकों की तैनाती ही होती है।
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दृश्य एक : समय 11 बजकर 50 मिनट। ¨नदूरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बबुरिहा प्रधानाचार्य सुनीता, शिक्षामित्र गीता उपस्थिति थीं। स्कूल में बच्चे खेल रहे थे। प्रधानाचार्य व शिक्षामित्र बैठे बातें करने में व्यस्त दिखे। वहीं ब्लैक बोर्ड पर दर्ज 24 तारीख हाल बयां कर रही थी कि बच्चों को किस तरह शिक्षा दी जा रही है। विद्यालय मे पंजीकृत सौ बच्चों में मात्र तीन बच्चे ही उपस्थित रहे।
दृश्य दो: समय दोपहर 12 बजकर 10 मिनट। ¨नदूरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बसारा में प्रधानाचार्य व एक अध्यापक बैठे बातें करने में व्यस्त दिखी। कुछ बच्चे खेलते व कुछ बच्चे कमरे में बैठे दिखे। यहां पर मौजूद प्रधानाचार्य बच्चों की पंजीकृत व उपस्थित बच्चों की संख्या नहीं बता सकीं।
दृश्य तीन : समय 12:35 बजे। ¨नदूरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुनीमपुर बरतरा में ताला लटक रहा था। गांव के ही रमेश रावत ने बताया कि विद्यालय कभी भी न तो समय से खुलता है और न समय से बंद होता है। विद्यालय में तैनात अध्यापकों में प्रतिदिन एक या दो ही अध्यापक आते हैं। कमोबेश ऐसी ही स्थिति प्राथमिक विद्यालय की भी है।
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छात्र कम शिक्षक ज्यादा : अभिभावक अनिल कुमार ने बताया स्कूल में बच्चों की संख्या के अनुरूप अध्यापकों की संख्या अधिक है, फिर भी बच्चों की पढ़ाई सही नहीं हो रही है। बच्चे अंग्रेजी तो दूर ¨हदी भी सही नहीं पढ़ पा रहे हैं। ग्राम मोहसंड निवासी बालकराम ने बताया कि सरकारी स्कूलों में कान्वेंट जैसी सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कोट
अगर ऐसा है तो नोटिस भेज कर स्पष्टीकरण लिया जाएगा। जांच में मामला सही होने पर उचित कार्रवाई भी की जाएगी।
-नवाब वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी, ¨नदूरा
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