68500 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों पर 25 सितंबर
को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।
सरकार के गलती
मानने के बाद भी यह साफ नहीं हो सका है कि अभर्थियों के कॉपियों में हेरा
फेरी, अंकों में फेरबदल व काट पीट का कारनामा किसके द्वारा और किसके इशारे
पर किया गया है। 8 सितंबर को इस मामले में बनी जांच कमेटी 18 दिन बाद भी अब
तक किसी प्रकार की कोई रिपोर्ट शासन को नहीं सौप पाई है।
कोर्ट ने आज जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। सरकार ने आधी अधूरी जांच
रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होते
हुए नाराज़गी का इज़हार किया। सरकार की ओर से बताया गया कि हमारी जांच जारी
है। कोर्ट ने जांच की समय सीमा पूछी तो महाधिवक्ता ने एक सप्ताह का समय
मांगा। कोर्ट ने एक सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर तय
कर दी।
बहस के दौरान 6127 अवशेष भर्ती का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ता रिज़वान
अंसारी ने बताया कि कोर्ट को अधिवक्ता अमित भदौरिया ने पूरे प्रकरण की
जानकारी दी। उनका कहना था कि 6127 पद आरक्षित वर्ग के हैं जिनपर सरकार ने
बिना किसी विज्ञापन के अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से भर दिया है। इस
मामले में कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
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