प्रदेश में हजार से ज्यादा अस्थायी शिक्षकों के नियमितीकरण पर निर्णय जल्द लिया जाएगा। इलाहाबाद हाई कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता ने कहा कि सात अगस्त 1993 से दिसंबर 2000 के बीच नियुक्त इन अस्थायी अध्यापकों को नियमित करने पर शीघ्र ही सरकार निर्णय लेगी। कोर्ट ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकार को सही जानकारी नहीं दी। दो मुद्दों को आपस में मिलाकर भ्रमित किया और उलझा रखा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने विनोद कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते तथ्य छिपाने वाले ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति मुख्यमंत्री के समक्ष पेश करने को कहा है। प्रकरण में अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी।
लेटेस्ट Sarkari Naukri, Govt Jobs, Results, Admit Card, Exam Dates और Education News के लिए भरोसेमंद वेबसाइट – E Sarkari Naukri Blog
Important Posts
Social Media Link
Advertisement
Breaking News
- मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का पोर्टल चल गया है कृपया आप सभी रजिस्ट्रेशन करना प्रारंभ कर दें।
- 2004 में शिक्षामित्रों की नियुक्तियों हेतु जारी विज्ञप्ति: इसी विज्ञप्ति के आधार पर हुआ था शिक्षामित्रों की का चयन
- प्रत्यावेदन के किये अपनी कंप्यूटर आईडी देखें : Download All District Data Of 72825 Recruitment
- 72825 भर्ती की याचिका में याची बनने के लिए क्या-2 चाहिए और कैसे शामिल हों, यहाँ करें सम्पर्क : प्रदेश अध्यक्ष आरटीई एक्टिविस्ट : 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती Latest News
- शिक्षा मित्र माहवार उपस्थिति प्रपत्र तारीख 1 से 31 तक, देखें और डाउनलोड करें,निचे क्लिक करें
Govt Jobs : Opening
प्रदेश के एक हजार से ज्यादा अस्थायी शिक्षकों के नियमितीकरण पर निर्णय जल्द होगा
।
कोर्ट ने कहा, अधिकारियों ने सरकार से सही तथ्य छिपाकर नौ नवंबर 2023 व आठ जुलाई 2024 को परिपत्र जारी कराया। कोर्ट ने निबंधक (अनुपालन) को कहा है कि 48 घंटे में आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजें ताकि कार्रवाई के लिए इसे मुख्यमंत्री के समक्ष
एक सप्ताह में पेश किया जा सके। याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा, शिवेंदु ओझा, वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा।
कोर्ट द्वारा पारित आदेश पर अपर महाधिवक्ता ने आदेश के पालन के लिए कुछ समय मांगा। साथ ही आश्वासन दिया कि वह आदेश की जानकारी सरकार को देंगे। उम्मीद है कि सरकार सही निर्णय लेगी। निर्णय वर्ष 2000 के बाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा संजय सिंह केस
में दिए गए फैसले के तहत लिया जाएगा। कहा गया कि सरकार इन अध्यापकों को वेतन देने पर भी विचार कर रही है, लेकिन पहले नियमितीकरण पर निर्णय लेना होगा। याची के अधिवक्ता ने कहा, सरकार भ्रमित है, पूरी स्कीम पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने अंतरिम आदेश से अध्यापकों को वेतन देने व सेवा जारी रखने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद सरकार ने आठ नवंबर, 2023 से वेतन भुगतान रोक रखा है। विशेष सचिव ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा को आठ जुलाई 2024 को आदेश दिया कि जिन्हें नौ नवंबर 2023 से हटाया गया है, उनमें हाईस्कूल के अध्यापकों को 25 हजार व इंटरमीडिएट के अध्यापकों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाए। इस सर्कुलर का शिक्षा विभाग को पालन करना चाहिए, यह बाध्यकारी है। अपर महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि धारा 33जी का मुद्दा सरकार ने जवाबी हलफनामे में नहीं लिया है। इस पर कोर्ट ने कहा अधिकारी दो मुद्दों को एक साथ मिक्स कर सरकार को गुमराह कर रहे हैं। वे ऐसा जानबूझकर कर रहे हैं, इस कारण सही निर्णय नहीं लिया जा रहा है।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें