भविष्य में पदोन्नति, वेतन और पेंशन पर पड़ सकता है सीधा असर
लखनऊ।
परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत सीनियर अध्यापकों के लिए यह सूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शासनादेश के अनुसार विद्यालय का सीनियर शिक्षक ही प्रभारी प्रधानाध्यापक (In-charge Headmaster) होगा। यदि कोई वरिष्ठ अध्यापक विद्यालय का प्रभार लेने से इनकार करता है, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम भविष्य में सामने आ सकते हैं।
📜 शासनादेश में क्या है स्पष्ट?
✔️ विद्यालय का प्रभार वरिष्ठतम अध्यापक को दिया जाएगा
✔️ यदि वरिष्ठ अध्यापक असमर्थ हो, तो हलफनामा देकर जूनियर शिक्षक को प्रभार दिया जा सकता है
✔️ ऐसी स्थिति में दो स्पष्ट शासनादेश लागू होते हैं
❌ प्रभार न लेने पर क्या नुकसान हो सकता है?
यदि कोई सीनियर अध्यापक जानबूझकर विद्यालय का प्रभार नहीं लेता, तो वह—
❌ पदोन्नति की मांग नहीं कर सकता
❌ प्रभारी प्रधानाध्यापक के वेतन का दावा नहीं कर सकता
❌ आठवें वेतन आयोग की फिटमेंट तालिका के लाभ से वंचित हो सकता है
❌ भविष्य में पेंशन भुगतान पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है
➡️ यानी आज का लिया गया निर्णय रिटायरमेंट के बाद भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
✅ प्रभार लेने वाले शिक्षक को क्या लाभ?
जो अध्यापक वर्तमान में विद्यालय का प्रभार संभाल रहा है, वह—
✔️ पदोन्नति की मांग कर सकता है
✔️ प्रभारी प्रधानाध्यापक वेतन का हकदार होगा
✔️ आठवें वेतन आयोग की फिटमेंट तालिका का लाभ पा सकता है
✔️ पेंशन निर्धारण में सुरक्षित रहेगा
🔔 सीनियर अध्यापकों के लिए स्पष्ट संदेश
📌 शासनादेश के अनुसार विद्यालय का प्रभार अपने पास ही रखें
📌 बिना ठोस कारण जूनियर को प्रभार सौंपने से बचें
📌 आज का निर्णय आपके वेतन, पदोन्नति और पेंशन को प्रभावित कर सकता है
👉 भविष्य के लिए यह शुभ संकेत नहीं होगा यदि आपने प्रभार नहीं लिया।