आवेदन में पूर्ण खुलासा निष्पक्षता और जनविश्वास के लिए जरूरी
📍 नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरी से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी पद के लिए आवेदन करते समय पूरी और सही जानकारी देना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि यह न केवल निष्पक्षता और ईमानदारी बल्कि जनविश्वास बनाए रखने की बुनियादी शर्त है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने की।
पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई 2025 के आदेश को पलट दिया।
कोर्ट ने साफ कहा:
“सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए सत्य और पूर्ण जानकारी देना आवश्यक है। सहानुभूति कानून का स्थान नहीं ले सकती।”
📄 क्या था पूरा मामला?
-
एक व्यक्ति की सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) पद पर नियुक्ति हुई थी
-
बाद में नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी गई कि
-
उसने आवेदन के समय
-
अपने खिलाफ दो लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी
-
-
व्यक्ति ने नियुक्ति रद्द किए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी
-
एकल न्यायाधीश ने याचिका स्वीकार की
-
खंडपीठ ने भी एकल जज के फैसले को बरकरार रखा
🏛️ सुप्रीम कोर्ट का फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने:
-
हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया
-
नियुक्ति निरस्त करने के निर्णय को कानूनी रूप से सही ठहराया
-
कहा कि जानकारी छिपाना गंभीर कदाचार (Misconduct) है
⚠️ सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के लिए संदेश
इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि:
-
आवेदन फॉर्म में कोई भी तथ्य छिपाना खतरनाक हो सकता है
-
चाहे मामला लंबित हो या बाद में निपटा हो
-
हर जानकारी का खुलासा जरूरी है
-
चयन के बाद भी तथ्य सामने आने पर नौकरी रद्द हो सकती है
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए कड़ा लेकिन जरूरी संदेश है।
ईमानदारी और पारदर्शिता के बिना सरकारी सेवा संभव नहीं है, और सहानुभूति कानून से ऊपर नहीं हो सकती।