UP High Court Latest News Hindi:
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही विषय से संबंधित दोहरी याचिकाएं (Duplicate Petitions) स्वीकार्य नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति निरस्तीकरण के खिलाफ याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है, तो उसी मामले से जुड़े वेतन रिकवरी आदेश को अलग याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मिर्जापुर निवासी कृष्णकांत की याचिका खारिज करते हुए दिया।
📝 मामला क्या था?
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कृष्णकांत की नियुक्ति 31 मार्च 1998 को हुई थी।
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विभाग ने 4 जुलाई 2025 को उनकी नियुक्ति को प्रारंभ से ही शून्य घोषित कर दिया और सेवाएं समाप्त कर दी।
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इसके बाद 19 अगस्त 2025 को उनसे ₹71,10,614 वेतन रिकवरी का आदेश जारी किया गया।
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कृष्णकांत ने सेवा समाप्ति आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे 17 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया गया।
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वर्तमान में उस आदेश के विरुद्ध उनकी स्पेशल अपील लंबित है।
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इस बीच याची ने वेतन रिकवरी आदेश को चुनौती देने के लिए नई याचिका दाखिल की, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
⚠️ हाईकोर्ट का निर्णय
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दोहरी याचिकाएं स्वीकार्य नहीं हैं।
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पहले खारिज याचिका से संबंधित संबंधित आदेश को अलग से चुनौती नहीं दी जा सकती।
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न्यायपालिका ने यह रुख स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया में अनुचित याचिकाओं से समय बर्बाद नहीं किया जा सकता।