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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: यूपी के संविदा शिक्षकों का वेतन बढ़कर ₹17,000 प्रति माह

 नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संविदा एवं अनुदेशक शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। शीर्ष अदालत ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा है कि लंबे समय से अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे शिक्षकों को अब ₹17,000 प्रति माह वेतन दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इसे शिक्षकों का न्यायसंगत अधिकार बताया है।


🔹 वर्षों से कम वेतन पर कार्य

प्रदेश में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत संविदा और अनुदेशक शिक्षक कई वर्षों से मात्र ₹7,000 प्रतिमाह मानदेय पर सेवाएं दे रहे थे। शिक्षकों का तर्क था कि इतनी कम राशि में जीवन यापन करना असंभव है और यह उनके श्रम का उचित मूल्य नहीं है।


🔹 सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • समान कार्य के लिए समान वेतन संविधान का मूल सिद्धांत है

  • अत्यंत कम मानदेय पर शिक्षकों से कार्य लेना अनुचित श्रम की श्रेणी में आता है

  • शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के साथ अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता

अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन मिलना ही चाहिए।


🔹 क्या होगा आदेश का प्रभाव?

इस फैसले के बाद:
✔️ संविदा और अनुदेशक शिक्षकों को ₹17,000 मासिक वेतन मिलेगा
✔️ शिक्षकों का आर्थिक और सामाजिक स्तर सुधरेगा
✔️ शिक्षा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा
✔️ शिक्षकों का मनोबल और कार्यक्षमता बढ़ेगी

यह फैसला हजारों शिक्षकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है।


🔹 नौकरी की सुरक्षा भी मजबूत

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय से कार्यरत संविदा शिक्षकों को अस्थायी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जब तक नई नीति नहीं बनती, तब तक उनकी सेवाएं सुरक्षित मानी जाएंगी।


🔹 शिक्षकों में खुशी की लहर

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद प्रदेश भर के संविदा शिक्षकों में खुशी का माहौल है। शिक्षक संगठनों ने इसे वर्षों की लड़ाई का परिणाम बताते हुए न्यायपालिका का आभार जताया है।


🔹 निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल वेतन वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों को भी मजबूती प्रदान करता है।

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