उत्तर प्रदेश के अनुदेशक (संविदा/अंशकालिक शिक्षक) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई की है। अदालत ने करीब 25,000 अनुदेशकों की नौकरी को सुरक्षित माना और उनके मानदेय बढ़ाने पर सकारात्मक संकेत दिए। राज्य सरकार की ओर से अपील दायर की गई थी, लेकिन इसे शीर्ष अदालत ने मान्यता नहीं दी। इससे यह वर्ग राहत महसूस कर रहा है।
🔹 मानदेय में वृद्धि की दिशा में निर्णायक संकेत
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन अनुदेशक शिक्षकों ने वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं, उनकी नियुक्तियों को समाप्त नहीं माना जाएगा। अदालत ने संकेत दिए हैं कि उनका मानदेय ₹17,000 प्रति माह निर्धारित किया जा सकता है। इससे पहले इन्हें कम वेतन पर कार्य करना पड़ता था, लेकिन अब यह बदलाव उनके आर्थिक भविष्य को मजबूत करेगा।
🔹 मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि अनुदेशक शिक्षकों ने लंबे समय से:
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नौकरी की सुरक्षा
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मानदेय में वृद्धि
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संविदा से स्थिरता
की मांग की है। अब सुप्रीम कोर्ट के संकेतों से यह मामला सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।
🔹 अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने यह स्पष्ट किया कि:
✔️ लंबे समय से सेवाएं देने वाले अनुदेशक शिक्षकों की नियुक्ति सुरक्षित रहेगी
✔️ मानदेय बढ़ाने पर विचार किया जाए
✔️ नियुक्तियों को संविदात्मक से अधिक स्थिर माना जाए
इन बिंदुओं से शिक्षकों को वैधानिक और सामाजिक संरक्षण मिलेगा।
🔹 आगे क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई के बाद अब:
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सरकार को अगली कार्रवाई करनी होगी
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कोर्ट के निर्देश के अनुसार मानदेय और नौकरी की स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी
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जल्द ही अगला आदेश या निर्णय भी आ सकता है
इससे उत्तर प्रदेश के हजारों अनुदेशक शिक्षकों को भविष्य की सुरक्षा और वेतन में स्थिरता मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।