प्रयागराज से आई रिपोर्ट के अनुसार, बेसिक शिक्षा परिषद के सात अध्यापकों के त्रुटिपूर्ण वेतन और अवशेष के रूप में 42 लाख रुपये के अनियमित भुगतान की शिकायत में तीन खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) दोषी पाए गए हैं।
हालांकि, अनियमित भुगतान की वसूली या तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, जिससे मामला लंबित जांच में उलझ गया।
🔹 जांच प्रक्रिया कैसे शुरू हुई?
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वित्त नियंत्रक की जांच के आधार पर
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अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कान्तालाल पाल ने
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वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी पवन सिंह को पत्र लिखकर
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जांच अधिकारी नियुक्त किया
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वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी ने लिखा कि
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मामले में जांच आख्या महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजी गई है
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जांच अधिकारी ने त्रुटिपूर्ण वेतन और अवशेष के अनियमित भुगतान के लिए संबंधित विकासखंड के BEO दोषी पाए हैं
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🔹 BSA और BEO की भूमिका
जांच अधिकारी ने यह भी पाया कि:
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BSA की भूमिका इस मामले में पर्याप्त नहीं रही
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BEO द्वारा किए गए भुगतान पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई
तीनों दोषी BEO वर्तमान में:
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प्रयागराज
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बिजनौर
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पीलीभीत
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गौतमबुद्धनगर
में तैनात हैं।
🔹 अगली कार्रवाई
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सहायक शिक्षा निदेशक (सेवा-2) डॉ. इरफान खान ने
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दोषी BEO से अनियमित भुगतान की वसूली के लिए पत्र लिखा
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अपर निदेशक ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के अंतर्गत
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अनुशासनिक कार्रवाई संस्थित की
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नए जांच अधिकारी नियुक्त किए
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अब जांच अधिकारी द्वारा सक्षम अधिकारी को नामित किए जाने के बाद नए जांच अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी।
🔹 शिकायत का इतिहास
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शिकायत उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री द्वारा 2019 में की गई थी
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जांच आख्या 2023 में प्रस्तुत हुई
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तब से मामला कार्रवाई के लिए लंबित है
🔹 निष्कर्ष
यह मामला परिषदीय विद्यालयों में वेतन व वित्तीय अनुशासन की गंभीर अनदेखी को उजागर करता है। अब अनियमित भुगतान की वसूली और BEO के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होने की उम्मीद है। इससे भविष्य में सरकारी स्कूलों में जिम्मेदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित होने की संभावना बढ़ेगी।
