25 साल बाद भी कंप्यूटर शिक्षक नहीं: UP के स्कूलों में आधुनिक शिक्षा पर बड़ा संकट
प्रयागराज से आई चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 4512 सरकारी सहायता प्राप्त और 2460 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर की पढ़ाई शुरू हुए ढाई दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कंप्यूटर
शिक्षकों की नियमित तैनाती नहीं हो सकी है।स्थिति यह है कि जहां कुछ गिने-चुने एडेड विद्यालय निजी संसाधनों से किसी तरह पढ़ाई करा रहे हैं, वहीं अधिकांश राजकीय स्कूलों में अन्य विषयों के शिक्षक ही कंप्यूटर जैसे तकनीकी विषय पढ़ाने को मजबूर हैं।
🔹 निजी स्कूलों में हालात और भी खराब
प्रदेश के 22 हजार से अधिक निजी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। अधिकांश स्कूलों में:
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न प्रशिक्षित शिक्षक हैं
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न आधुनिक लैब चालू है
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और न ही नियमित पढ़ाई हो पा रही है
🔹 पाठ्यक्रम हाई-टेक, शिक्षक जीरो
यूपी बोर्ड के कंप्यूटर पाठ्यक्रम में शामिल हैं:
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🔹 Hacking
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🔹 Artificial Intelligence (AI)
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🔹 Robotics
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🔹 Drone Technology
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🔹 Python Programming
लेकिन इन आधुनिक विषयों को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा निदेशालय ने बीते 4-5 वर्षों में कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे, फिर भी अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी।
🔹 आउटसोर्स योजना भी फेल
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वित्तीय वर्ष 2022-23 में
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890 राजकीय विद्यालयों में
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GeM पोर्टल के माध्यम से
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₹25,000 प्रतिमाह मानदेय पर
कंप्यूटर शिक्षक रखने का प्रस्ताव था
लेकिन यह योजना भी कागजों तक सीमित रह गई।
🔹 ICT योजना बंद, लैब पर ताला
एक दशक पहले एडेड कॉलेजों में ICT योजना के तहत:
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हर स्कूल को 10 कंप्यूटर
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₹15,000 मानदेय पर आउटसोर्स शिक्षक
रखे गए थे, लेकिन 5 साल बाद योजना बंद हो गई।
आज स्थिति यह है कि:
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अधिकांश स्कूलों की कंप्यूटर लैब बंद पड़ी है
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कुछ जगह निजी शिक्षक, जिनका भुगतान छात्रों से फीस लेकर किया जा रहा है
🔹 संविदा शिक्षक आज भी इंतजार में
लंबे समय से कार्यरत संविदा कंप्यूटर शिक्षक आज भी:
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नियमितीकरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं
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लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही
🔹 छात्र भी हो रहे निराश
कंप्यूटर शिक्षक न होने का सीधा असर छात्रों पर दिख रहा है:
| वर्ष | हाईस्कूल (10वीं) | इंटर (12वीं) |
|---|---|---|
| 2026 | 61,757 | 18,530 |
| 2024 | 62,162 | 16,587 |
| 2023 | 67,033 | 18,783 |
👉 10वीं में कंप्यूटर लेने वाले छात्रों की संख्या ज्यादा है,
👉 लेकिन 12वीं तक आते-आते एक तिहाई से भी कम छात्र रह जाते हैं।
जबकि B.Tech और IT सेक्टर में सबसे ज्यादा मांग कंप्यूटर साइंस की है।
🔹 निष्कर्ष
UP के माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा की स्थिति नीति, बजट और इच्छाशक्ति की कमी को उजागर करती है। जब पाठ्यक्रम 21वीं सदी का है, तो उसे पढ़ाने वाले शिक्षक भी उसी स्तर के होने चाहिए।
अगर समय रहते कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो इसका सीधा नुकसान प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य को होगा।